मध्य अफ्रीका में वीज़ा संकट में फंसे कर्नाटक के हक्की-पक्की जनजाति के सदस्य: फिर दोहराया गया विदेश में संकट
कर्नाटक की अर्ध-घुमंतू हक्की-पक्की जनजाति के आठ सदस्य मध्य अफ्रीका में वीज़ा समाप्त होने के बाद गंभीर संकट में फंस गए हैं। पासपोर्ट जब्त, भारी जुर्माना और गिरफ्तारी की आशंका ने उन्हें कानूनी और मानसिक रूप से बंधक बना दिया है। यह स्थिति भारत सरकार से तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की मांग कर रही है।
पारंपरिक व्यापार यात्रा बनी कानूनी मुसीबत
हक्की-पक्की समुदाय के लोग, जो मुख्यतः दावणगेरे, शिवमोग्गा और चिक्कमगलुरु जिलों में रहते हैं, पारंपरिक रूप से जड़ी-बूटी और स्वदेशी उत्पादों की बिक्री के लिए विदेश यात्रा करते हैं। इसी कड़ी में 2025 में आठ लोग मध्य अफ्रीका गए थे। परंतु 22 दिसंबर को उनके वीज़ा की वैधता समाप्त हो गई, जिससे वे स्थानीय अधिकारियों की निगरानी में आ गए।
जुर्माना, पासपोर्ट जब्ती और गिरफ्तारी का खतरा
समूह के अनुसार, स्थानीय प्रशासन ने प्रत्येक व्यक्ति पर लगभग ₹1.5 लाख का जुर्माना लगाया और चेतावनी दी कि भुगतान न होने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। स्थिति और भी गंभीर तब हुई जब पुलिस ने उनके पासपोर्ट और वीज़ा दस्तावेज जब्त कर लिए, जिससे उनकी वापसी असंभव हो गई। अब यह समूह सीमित संसाधनों के साथ अत्यधिक भय में जीवन यापन कर रहा है।
विदेश मंत्रालय से रेस्क्यू की अपील
विदेश से जारी एक वीडियो संदेश में इन फंसे हुए भारतीय नागरिकों ने विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे जुर्माना भरने में असमर्थ हैं और भारत सरकार से पासपोर्ट की वापसी और सुरक्षित वतन वापसी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हक्की-पक्की कर्नाटक की एक अर्ध-घुमंतू जनजाति है।
- यह समुदाय जड़ी-बूटी विक्रय और पारंपरिक चिकित्सा कार्यों के लिए विदेश यात्रा करता है।
- विदेश में वीज़ा अवधि समाप्त होने पर व्यक्ति जुर्माना, हिरासत और पासपोर्ट जब्ती का सामना कर सकता है।
- भारतीय दूतावास नागरिकों की सहायता राजनयिक और कांसुलर चैनलों के माध्यम से करता है।
पिछली घटनाओं की पुनरावृत्ति और दबाव
कर्नाटक हक्की पक्की ट्राइबल एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत कुमार ने बताया कि संकटग्रस्त नागरिकों की मदद के लिए स्थानीय सांसदों, विशेषकर दावणगेरे की सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन से संपर्क किया गया है। यह घटना 2023 की सूडान संकट की याद दिलाती है, जब 150 से अधिक हक्की-पक्की सदस्य ऑपरेशन कावेरी के तहत सफलतापूर्वक बचाए गए थे।
फंसे हुए लोगों के परिजन भारत में बेहद चिंतित हैं और सरकार से तत्काल रेस्क्यू मिशन की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनके प्रियजनों को सुरक्षित घर लाया जा सके। यह एक बार फिर विदेशों में भारत के जनजातीय नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को उजागर करता है।