मध्यप्रदेश के नीमच में गिलैन-बैरे सिंड्रोम का प्रकोप: बच्चों की मौत से स्वास्थ्य अलर्ट
पश्चिमी मध्यप्रदेश के नीमच जिले में गिलैन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barre Syndrome – GBS) के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है, जिससे दो बच्चों की मृत्यु हो चुकी है और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। यह दुर्लभ प्रतिरक्षा-जनित तंत्रिका रोग राजस्थान की सीमा से लगे क्षेत्रों में गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
मनासा और आसपास के क्षेत्रों में प्रकोप की शुरुआत
- जनवरी के दूसरे सप्ताह में मनासा कस्बे में 7 और 15 वर्ष के दो लड़कों की तीन दिनों के भीतर मृत्यु हुई।
- इसके बाद 13 अतिरिक्त मामले सामने आए हैं:
- 11 रोगी 18 वर्ष से कम आयु के हैं।
- 2 वयस्क (31 और 60 वर्ष के) भी संक्रमित पाए गए हैं।
- 12 मामले मनासा से हैं, जबकि 1 मामला नीमच शहर से है।
- मंदसौर जिले में एक संदिग्ध मामला मिला है, जो क्षेत्रीय प्रसार की संभावना को दर्शाता है।
चिकित्सा प्रतिक्रिया और मरीजों की स्थिति
- कुल 13 मामलों में से:
- 5 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
- 5 मरीज इंदौर के MY और बॉम्बे हॉस्पिटल में उपचाररत हैं।
- 3 अन्य जयपुर और उदयपुर में इलाज करा रहे हैं।
- मध्यप्रदेश सरकार ने IVIG (इंट्रावीनस इम्युनोग्लोब्युलिन) उपचार के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है।
निगरानी और जांच प्रयास
- WHO और इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम की टीमें सक्रिय रूप से निगरानी कर रही हैं।
- जल स्रोत, खाद्य आपूर्ति और पोल्ट्री पर व्यापक सर्वे किए जा रहे हैं।
- 5,000 से अधिक परिवारों के 30,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
- नमूने AIIMS भोपाल, हैदराबाद और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को भेजे गए हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गिलैन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक ऑटोइम्यून तंत्रिका विकार है जो पेरिफेरल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है।
- यह अक्सर Campylobacter jejuni, इन्फ्लूएंजा, या वायरल संक्रमणों के बाद उत्पन्न होता है।
- IVIG और प्लाज्मा एक्सचेंज इसके मुख्य उपचार हैं।
- अधिकांश मरीज स्वस्थ हो जाते हैं, परंतु गंभीर मामलों में श्वसन विफलता का खतरा रहता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय और सावधानियां
- मनासा सिविल अस्पताल में विशेष GBS वार्ड और वेंटिलेटर सुविधा स्थापित की जा रही है।
- स्वास्थ्य विभाग की टीमें निरंतर स्क्रीनिंग में लगी हैं।
- GBS के लक्षणों में शामिल हैं:
- अचानक हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नता,
- सांस लेने या निगलने में कठिनाई – जो आपातकालीन उपचार की मांग करते हैं।
इस दुर्लभ रोग का समय पर पता लगाना और समुचित चिकित्सा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। नीमच में उभरते इस संकट ने ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सतर्कता और आपदा प्रबंधन की अहमियत को उजागर कर दिया है।
Originally written on
January 25, 2026
and last modified on
January 25, 2026.