मणिपुर में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की पहल: आकाशवाणी इम्फाल से थाडो भाषा में लाइव प्रसारण फिर से शुरू करने की तैयारी
प्रसार भारती ने मणिपुर में थाडो भाषा में लाइव रेडियो कार्यक्रम फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह कदम 2023 में हुए मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के बाद उठाया गया है, और इसे राज्य में विश्वास बहाली और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
लाइव प्रसारण पुनः शुरू करने की दिशा में प्रयास
आकाशवाणी इम्फाल के कार्यक्रम प्रमुख से थाडो और मणिपुर की अन्य प्रमुख बोलियों में लाइव प्रसारण के लिए स्टाफ की बहाली या नई भर्ती को लेकर इनपुट मांगे गए हैं।
12 दिसंबर 2025 को प्रसार भारती द्वारा भेजे गए पत्र में यह पहल थाडो इनपी मणिपुर की औपचारिक मांग के बाद की गई है, जिसमें या तो पहले से नियुक्त थाडो स्टाफ की वापसी या सभी समुदायों से नई नियुक्तियों की मांग की गई थी।
2023 की जातीय हिंसा का प्रभाव
मई 2023 में मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच हिंसा के बाद, थाडो स्टाफ को इम्फाल घाटी छोड़नी पड़ी, जिससे आकाशवाणी इम्फाल से थाडो भाषा में लाइव कार्यक्रम बंद हो गए। तब से केवल रिकॉर्डेड थाडो गीत प्रसारित किए जा रहे हैं।
प्रसार भारती ने स्पष्ट किया है कि थाडो समेत प्रमुख भाषाओं में रिकॉर्डेड कार्यक्रम प्रतिदिन प्रसारित होते हैं, जिनमें थाडो भाषा का प्रसारण शाम 5 से 5:30 बजे तक होता है।
भाषा, पहचान और शांति स्थापना
थाडो इनपी मणिपुर ने कहा है कि लाइव प्रसारण की बहाली थाडो भाषा, संस्कृति और सामाजिक पहचान के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि “थाडो को कुकी समझे जाने” जैसी पूर्व की आशंकाएं हालिया समुदायों के बीच शांति बैठकों के माध्यम से सुलझा ली गई हैं।
उन्होंने आशा जताई कि आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के आश्वासनों के साथ स्टाफ अब बिना भय के लौट सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रसार भारती भारत का सार्वजनिक सेवा प्रसारणकर्ता है।
- आकाशवाणी प्रसार भारती की रेडियो सेवा है।
- थाडो मणिपुर की एक मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजाति है।
- क्षेत्रीय भाषाओं में लाइव प्रसारण संस्कृतिक संरक्षण और समुदाय सशक्तिकरण का माध्यम होता है।
व्यापक संदर्भ और समुदाय की पहचान
यह पहल ऐसे समय पर हो रही है जब अगस्त 2024 में असम के कार्बी आंगलोंग में थाडो समुदाय के नेता नेहकाम जोम्हाओ की हत्या के बाद समुदाय की पहचान को लेकर भावनाएं फिर से उभरी हैं।
नवंबर 2024 में गुवाहाटी में आयोजित थाडो सम्मेलन में एक घोषणा-पत्र पारित किया गया जिसमें थाडो को मणिपुर की स्वतंत्र आदिवासी जनजाति के रूप में पुनः मान्यता दी गई, जो अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास के साथ 1956 के राष्ट्रपति आदेश के तहत आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है।
इस प्रकार, थाडो भाषा में प्रसारण की बहाली न केवल सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि मणिपुर में शांति और समावेशी संवाद को भी आगे बढ़ाएगी।