मणिपुर के चुराचांदपुर में 78वां जोमी राष्ट्रीय दिवस उत्साह और एकता के साथ संपन्न
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में 78वां जोमी राष्ट्रीय दिवस सांस्कृतिक उल्लास और राजनीतिक महत्व के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम इवेंजेलिकल बैपटिस्ट कन्वेंशन (ईबीसी) के सेंटेनरी हॉल में आयोजित हुआ, जिसमें सामुदायिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। आयोजन ने जहां जोमी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया, वहीं राज्य में शांति बहाली और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के प्रयासों को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम में मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। करोंग के विधायक के. कुमो शा, सेनापति के स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) के सदस्य, उपायुक्त धरुण कुमार एस तथा 27 सेक्टर असम राइफल्स के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक आयोजन और सामुदायिक एकजुटता
समारोह में पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियां, विभिन्न समुदायों के गायन दलों द्वारा भजन-कीर्तन और समन्वित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को जीवंत बनाया। सामूहिक प्रार्थनाएं की गईं और दिवंगत नेताओं की स्मृति में एक मिनट का मौन रखा गया।
जोमी परिषद के अध्यक्ष, जोमी री-यूनिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन (जेडआरओ) के अध्यक्ष और मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में समुदाय की दृढ़ता, एकता और भविष्य की आकांक्षाओं पर बल दिया। यह दिवस न केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि मणिपुर और आसपास के क्षेत्रों में जोमी समुदाय के ऐतिहासिक महत्व को भी दर्शाता है।
विकास और शांति बहाली पर सरकारी आश्वासन
उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार जोमी समुदाय की मांगों पर मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श कर रही है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी द्वारा वित्तपोषित एक टर्फ ग्राउंड को स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही उसका निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।
उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार जातीय तनाव के बाद मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक संवाद को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
आंतरिक विस्थापितों के पुनर्वास पर जोर
मीडिया से बातचीत में उपमुख्यमंत्री ने आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) के शीघ्र पुनर्वास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आवास, मूलभूत सुविधाएं और आजीविका समर्थन सुनिश्चित करना व्यापक शांति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थायी पुनर्वास को विश्वास बहाली और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
प्रभावित जिलों में पुनर्वास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर समन्वित कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि सामाजिक ताने-बाने को पुनर्स्थापित किया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* जोमी राष्ट्रीय दिवस जोमी समुदाय की पहचान और एकता का प्रतीक है।
* चुराचांदपुर मणिपुर का एक प्रमुख जिला है, जहां जोमी समुदाय की उल्लेखनीय आबादी है।
* स्वायत्त जिला परिषदें (एडीसी) पूर्वोत्तर राज्यों में छठी अनुसूची के अंतर्गत कार्य करती हैं।
* असम राइफल्स गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली अर्धसैनिक बल है।
78वें जोमी राष्ट्रीय दिवस का आयोजन सांस्कृतिक गर्व और प्रशासनिक सहभागिता का प्रतीक रहा। वरिष्ठ अधिकारियों और सुरक्षा प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि राज्य सरकार और जनजातीय समुदायों के बीच संवाद की प्रक्रिया जारी है। विकास, सामंजस्य और सुरक्षा के संतुलन के साथ मणिपुर को स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास निरंतर जारी है।