मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन की नियुक्ति पर विरोध: कुकी-जो समुदाय में गहराता विभाजन

मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन की नियुक्ति पर विरोध: कुकी-जो समुदाय में गहराता विभाजन

मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में नेमचा किपजेन की नियुक्ति को जहाँ समावेशी शासन का प्रतीक बताया जा रहा है, वहीं कुकी-जो समुदाय के भीतर इससे तेज विरोध और असंतोष उभरा है। यह विरोध मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष और कुकी-जो समुदाय की अलग प्रशासन की मांग के बीच सामने आया है।

नाज़ुक राजनीति के बीच ऐतिहासिक नियुक्ति

60 वर्षीय नेमचा किपजेन न केवल मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं, बल्कि वे इस पद तक पहुँचने वाली पहली कुकी-जो नेता भी हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअल रूप से शपथ ली। यह शपथ राज्यपाल अजय कुमार भल्ला द्वारा दिलाई गई, वहीं मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इंफाल में शपथ ली।

भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में तीन उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं — कुकी-जो, नागा और मैतेई समुदायों से — जिसे भाजपा ने “लोकप्रिय और समावेशी सरकार” बताया है।

विरोध के स्वर: “नेमचा इन, न्याय आउट”

मणिपुर भवन के बाहर कुकी-जो छात्रों और नागरिक समाज संगठनों ने “Nemcha In, Justice Out” जैसे नारों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किपजेन की सरकार में भागीदारी कुकी-जो समुदाय की सामूहिक राजनीतिक मांगों के खिलाफ है, विशेष रूप से अलग प्रशासन और विधानमंडल की माँग, जो 3 मई 2023 को जातीय हिंसा के बाद उठाई गई थी।

इस हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई, 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए और आज भी यह मणिपुर की राजनीति और सामाजिक विश्वास को प्रभावित कर रही है।

राजनीतिक रुख में विरोधाभास

नेमचा किपजेन उन 10 कुकी-जो विधायकों में शामिल थीं जिन्होंने पहले अलग प्रशासन की माँग का समर्थन किया था। जून 2023 में उनकी आधिकारिक निवास को भी आग के हवाले कर दिया गया था। लेकिन अब उनका भाजपा विधायी दल की बैठक में शामिल होना और सरकार में पद लेना कुकी-जो विधायकों की एकजुटता को तोड़ने के रूप में देखा जा रहा है।

Kuki Inpi Manipur, जो इस समुदाय का शीर्ष संगठन है, ने औपचारिक रूप से विरोध दर्ज कराया है कि कोई भी कुकी-जो विधायक नई सरकार में भाग न ले।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हुई थी।
  • नेमचा किपजेन मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं।
  • कुकी-जो समुदाय की मांग में एक अलग प्रशासनिक इकाई और विधानमंडल शामिल है।
  • मणिपुर भवन, नई दिल्ली पूर्वोत्तर समुदायों के लिए राजनीतिक व विरोध का प्रमुख स्थल रहा है।

कुकी-जो समुदाय के भीतर गहराता संकट

विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्र और राहत शिविरों में रह रहे हिंसा पीड़ितों का कहना है कि न्याय उसी व्यवस्था से संभव नहीं जो उनके अनुसार हिंसा के लिए जिम्मेदार रही है।

किपजेन द्वारा कई घटनाओं पर चुप्पी और अब कार्यपालिका में भागीदारी ने उनके प्रति अलगाव और असंतोष की भावना को और गहरा किया है।

उनकी नियुक्ति आज मणिपुर की राजनीति में एक ओर जहाँ ऐतिहासिक मील का पत्थर है, वहीं दूसरी ओर यह जातीय और राजनीतिक विभाजन की तीखी रेखा भी बन चुकी है।

यह घटनाक्रम मणिपुर की जटिल जातीय राजनीति में एक नई और चुनौतीपूर्ण परत जोड़ता है, जहाँ प्रतीकात्मक समावेशिता और समुदाय आधारित मांगें अक्सर टकराव में आ जाती हैं।

Originally written on February 6, 2026 and last modified on February 6, 2026.

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