मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने 2026 बाफ्टा अवॉर्ड्स में रचा इतिहास
भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मणिपुरी भाषा की कमिंग-ऑफ-एज फिल्म ‘बूंग’ ने 2026 के ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (बाफ्टा) अवॉर्ड्स में ‘सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म’ का सम्मान जीता है। यह जीत अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्षेत्रीय भारतीय कहानी कहने की कला को मिली बड़ी मान्यता के रूप में देखी जा रही है। इस सफलता ने भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी द्वारा निर्देशित और रितेश सिधवानी तथा फरहान अख्तर द्वारा निर्मित इस 2024 की फिल्म ने ‘जूटोपिया 2’, ‘लीलो एंड स्टिच’ और ‘आर्को’ जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार हासिल किया। इस श्रेणी में हॉलीवुड की चर्चित फिल्मों की मौजूदगी के बीच ‘बूंग’ की जीत को विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
पुरस्कार की घोषणा एक यादगार क्षण में की गई, जब काल्पनिक पात्र पैडिंगटन बियर ने हल्के-फुल्के अंदाज में विजेता का नाम घोषित किया। जनवरी में घोषित नामांकनों के बाद से ही ‘बूंग’ को एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
‘बूंग’ की कहानी मणिपुर सीमा क्षेत्र में रहने वाले एक स्कूली बालक के जीवन पर केंद्रित है, जो नस्लीय तनाव और सामाजिक-राजनीतिक जटिलताओं के बीच अपनी पहचान की तलाश करता है। फिल्म में बच्चे की भावनात्मक यात्रा को दर्शाया गया है, जिसमें पूर्वाग्रह, अनिश्चितता और पारिवारिक संबंधों की चुनौतियां प्रमुख हैं।
फिल्म ने एक बाल दृष्टिकोण के माध्यम से पहचान, अपनत्व और संघर्ष जैसे गहरे विषयों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है। इसकी प्रामाणिक क्षेत्रीय पृष्ठभूमि और सशक्त कथा ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को प्रभावित किया।
‘बूंग’ की सफलता यह दर्शाती है कि भारतीय सिनेमा अब केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय भाषाओं में बनी फिल्में भी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। परिवार-उन्मुख श्रेणी में यह जीत इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय संदर्भ में कही गई कहानियां भी सार्वभौमिक भावनाओं को छू सकती हैं।
फिल्म की टीम ने पहले नामांकन को ही सम्मान बताया था, और अब यह जीत भारतीय कहानीकारों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।
- बाफ्टा का पूर्ण रूप ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स है।
- मणिपुर भारत का पूर्वोत्तर राज्य है, जिसकी सीमा म्यांमार से लगती है।
- बच्चों और परिवार केंद्रित फिल्में सामाजिक विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
- भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा में हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में निर्मित फिल्में शामिल होती हैं।
‘बूंग’ की यह उपलब्धि मणिपुरी सिनेमा और भारतीय क्षेत्रीय फिल्म उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। यह जीत दर्शाती है कि विविध भारतीय कथाएं अब वैश्विक दर्शकों के बीच स्वीकृति और सराहना प्राप्त कर रही हैं। आने वाले वर्षों में ऐसी सफलताएं भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और सशक्त बनाएंगी।