भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025 में भारत की रैंकिंग में सुधार: वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एक नजर

भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025 में भारत की रैंकिंग में सुधार: वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एक नजर

Transparency International द्वारा जारी Corruption Perceptions Index (CPI) 2025 में भारत ने पांच स्थानों की छलांग लगाते हुए 91वें स्थान पर जगह बनाई है। यह सुधार भले ही सीमित हो, परंतु सार्वजनिक क्षेत्र की पारदर्शिता और शासन में प्रगति की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। CPI दुनिया के 182 देशों और क्षेत्रों में सरकारी भ्रष्टाचार के स्तर को लेकर विशेषज्ञों और संस्थानों की राय पर आधारित है।

भारत की रैंकिंग और स्कोर में बदलाव

CPI 2025 के अनुसार, भारत का स्कोर पिछले वर्ष की तुलना में एक अंक बढ़कर 91वें स्थान पर पहुँच गया है, जबकि 2024 में भारत 96वें स्थान पर था। CPI सूचकांक 0 से 100 के पैमाने पर काम करता है, जहां 0 अत्यधिक भ्रष्ट और 100 अत्यंत पारदर्शी सार्वजनिक क्षेत्र को दर्शाता है।

भारत का यह सुधार शासन और भ्रष्टाचार विरोधी उपायों में कुछ हद तक प्रगति को दर्शाता है, लेकिन रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह सुधार अस्थायी और असमान है। इसका अर्थ यह है कि अभी भी संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता बनी हुई है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक परिदृश्य

रिपोर्ट बताती है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रगति धीमी और असंगत रही है। पिछले वर्ष कई देशों में जनता द्वारा भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी के खिलाफ प्रदर्शन और असंतोष दर्ज किया गया।

वैश्विक स्तर पर स्थिति और भी गंभीर है। CPI 2025 में वैश्विक औसत स्कोर गिरकर 42 पर पहुँच गया है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। दो-तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से नीचे है, जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार अब भी सार्वजनिक सेवाओं, आपदा प्रबंधन और सतत विकास को बाधित कर रहा है।

प्रेस स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व को लेकर चिंता

CPI रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत उन देशों में शामिल है, जहां भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए वातावरण खतरनाक माना जाता है। 2012 के बाद से अब तक गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या हुई है, जिनमें से 90% से अधिक ऐसे देशों में हुईं जिनका CPI स्कोर 50 से कम है।

नागरिक समाज और मीडिया पर लगाम लगाने वाली नीतियाँ लोकतांत्रिक निगरानी को कमजोर बनाती हैं और भ्रष्टाचार को पनपने का अवसर देती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक Transparency International द्वारा प्रतिवर्ष जारी किया जाता है।
  • CPI में देश 0 (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (पूर्णतः पारदर्शी) के पैमाने पर रैंक किए जाते हैं।
  • भारत 2025 में 182 देशों में 91वें स्थान पर रहा।
  • 2025 का वैश्विक औसत CPI स्कोर गिरकर 42 पर पहुँच गया है।

वैश्विक स्तर पर नेता और पिछड़े देश

CPI 2025 में डेनमार्क ने 89 अंकों के साथ शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। उसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। वहीं दक्षिण सूडान और सोमालिया 9 अंकों के साथ सबसे नीचे हैं।

महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक देशों में ब्रिटेन 20वें स्थान पर और संयुक्त राज्य अमेरिका 29वें स्थान पर रहा, जो यह दर्शाता है कि विकसित लोकतंत्रों में भी भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन में गिरावट आई है।

भारत की स्थिति में सुधार उत्साहजनक है, लेकिन इसे स्थायी बनाने के लिए प्रशासनिक पारदर्शिता, प्रेस की स्वतंत्रता और सशक्त नागरिक समाज की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करना होगा।

Originally written on February 11, 2026 and last modified on February 11, 2026.

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