भोपाल में आयोजित होगी 22वीं ऑल इंडिया वार्षिक टीडीएस कॉन्फ्रेंस
भोपाल में आगामी 22वीं ऑल इंडिया वार्षिक टीडीएस (Tax Deducted at Source) कॉन्फ्रेंस आयोजित होने जा रही है, जो कर प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करती है। इस सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ कर अधिकारी हालिया नीतिगत परिवर्तनों की समीक्षा करेंगे और डिजिटल पहलों पर चर्चा करेंगे, जिनका उद्देश्य कर तंत्र को और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाना है।
राष्ट्रीय स्तर की भागीदारी और उद्घाटन सत्र
सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा। उनके साथ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य, प्रमुख मुख्य आयुक्त, मुख्य आयुक्त, महानिदेशक और विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ टीडीएस अधिकारी मौजूद रहेंगे। यह एक दिवसीय सम्मेलन होगा जिसमें विभिन्न जोनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे और कर प्रशासन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।
आयकर अधिनियम में हालिया संशोधनों पर फोकस
कार्यक्रम का मुख्य भाग आयकर अधिनियम, 2025 में किए गए हालिया संशोधनों की समीक्षा को समर्पित होगा। इसमें संशोधित टीडीएस प्रावधानों, बढ़ी हुई रिपोर्टिंग सीमाओं और अद्यतन कंपाउंडिंग दिशानिर्देशों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इन परिवर्तनों का उद्देश्य करदाताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं को कम करना है।
स्वैच्छिक अनुपालन और पारदर्शिता को बढ़ावा
सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान एक नया जागरूकता पोस्टर जारी किया जाएगा, जिसमें स्वैच्छिक कर अनुपालन और सटीक टीडीएस कटौती की आवश्यकता पर बल दिया जाएगा। अधिकारी इस अवसर पर यह भी रेखांकित करेंगे कि पारदर्शिता, दक्षता और करदाता-अनुकूल नीतियाँ आधुनिक कर प्रशासन की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 22वीं ऑल इंडिया वार्षिक टीडीएस कॉन्फ्रेंस का आयोजन भोपाल में किया जा रहा है।
- इसमें सीबीडीटी के अध्यक्ष, प्रमुख आयुक्त और विभिन्न जोनों के अधिकारी भाग ले रहे हैं।
- सम्मेलन में आयकर अधिनियम, 2025 के संशोधनों और नई कंपाउंडिंग गाइडलाइंस पर चर्चा होगी।
- स्वैच्छिक कर अनुपालन और डिजिटल टूल्स इस सम्मेलन के प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं।
डिजिटल उपकरणों और डेटा-आधारित अनुपालन पर चर्चा
इस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण विषय कर प्रशासन में डेटा-आधारित निगरानी प्रणाली और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स का उपयोग है। अधिकारियों द्वारा ऐसे आधुनिक उपकरणों की समीक्षा की जाएगी जो अनुपालन को सरल बनाएं, पारदर्शिता बढ़ाएं और विवाद निपटान की प्रक्रिया को तेज़ बनाएं। अद्यतन कंपाउंडिंग ढाँचे के अंतर्गत डिजिटल मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं को और मजबूत करने पर भी विशेष चर्चा होगी।