भूमिगत माइकोराइजल फफूंद: जलवायु संतुलन में अदृश्य लेकिन अनिवार्य भागीदार
पृथ्वी की सतह के नीचे — जंगलों, घास के मैदानों और कृषि भूमि के भीतर — एक विशाल माइकोराइजल फफूंद नेटवर्क फैला हुआ है, जो पृथ्वी की जलवायु को चुपचाप संतुलित करने का कार्य करता है। ये फफूंद पौधों की जड़ों से पोषक तत्वों की अदला-बदली करते हैं और हर साल लगभग 13 अरब टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को पृथ्वी की सतह के नीचे जमा करते हैं। अब तक पौधों के सहायक के रूप में देखे गए ये जीव अब धरती के सबसे महत्त्वपूर्ण जीवन-समर्थक प्रणालियों में गिने जा रहे हैं।
टायलर पुरस्कार: पर्यावरणीय शोध में उत्कृष्टता की मान्यता
प्रसिद्ध अमेरिकी विकासवादी जीवविज्ञानी टोबी कीयर्स को टायलर पुरस्कार फॉर एनवायरनमेंटल अचीवमेंट से सम्मानित किया गया है, जिसे अक्सर पर्यावरण का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है। उनकी अनुसंधान ने माइकोराइजल फफूंद की पारिस्थितिक और जलवायु संबंधी भूमिका को दुनिया के सामने उजागर किया है। कीयर्स वर्तमान में Vrije Universiteit Amsterdam में यूनिवर्सिटी रिसर्च चेयर हैं और उनका कार्य मिट्टी पारिस्थितिकी के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नया आकार दे रहा है।
भूमिगत कार्बन भंडारण और वैश्विक मानचित्रण
पौधे अपनी अतिरिक्त कार्बन ऊर्जा को मिट्टी में स्थानांतरित करते हैं, जिसे माइकोराइजल फफूंद संरक्षित करती हैं। यह प्रक्रिया सालाना 13.12 बिलियन टन CO₂ को भूमिगत भंडारण में रखती है—जो वैश्विक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन के एक-तिहाई के बराबर है। कीयर्स और उनके सहयोगियों द्वारा विकसित Underground Atlas ने इन फफूंद के वैश्विक वितरण का मानचित्र तैयार किया है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकांश फफूंद जैव विविधता हॉटस्पॉट संरक्षित क्षेत्रों से बाहर हैं।
जैविक बाजार सिद्धांत: प्रकृति का अद्भुत लेन-देन
टोबी कीयर्स की 2011 में Science जर्नल में प्रकाशित शोध में यह दिखाया गया कि माइकोराइजल फफूंद ‘बायोलॉजिकल मार्केटप्लेस’ की तरह व्यवहार करती हैं। ये फफूंद अपने जाल-जैसे माइक्रोस्कोपिक धागों से पौधों को फॉस्फोरस और नाइट्रोजन उपलब्ध कराती हैं और बदले में उनसे शर्करा और वसा प्राप्त करती हैं। प्रयोगों से यह साबित हुआ कि फफूंद पोषक तत्वों को ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित करती हैं जहाँ उनकी अधिक मांग होती है, जिससे उन्हें अधिकतम कार्बन लाभ मिलता है—यह एक प्रकार की प्राकृतिक आपूर्ति और मांग प्रणाली है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- माइकोराइजल फफूंद पौधों की जड़ों के साथ सहजीवी नेटवर्क बनाती हैं।
- ये प्रतिवर्ष 13 अरब टन से अधिक CO₂ भूमिगत रूप से संचित करती हैं।
- टायलर पुरस्कार में $250,000 का नकद पुरस्कार शामिल होता है।
- अधिकांश फफूंद जैव विविधता हॉटस्पॉट संरक्षित क्षेत्रों से बाहर स्थित हैं।
संरक्षण, SPUN और भविष्य की दिशा
टोबी कीयर्स की हालिया शोधों ने रियल-टाइम रोबोटिक इमेजिंग सिस्टम के माध्यम से फफूंद की वृद्धि को ट्रैक किया है और वैश्विक प्रजातियों का विस्तृत नक्शा तैयार किया है। संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने Society for the Protection of Underground Networks (SPUN) की सह-स्थापना की, जो भूमिगत फफूंद नेटवर्क को कानूनी संरक्षण दिलाने की दिशा में काम करता है।
उनका शोध यह दर्शाता है कि स्थलीय जीवन की उत्पत्ति ही प्राचीन पौधों और फफूंद के साझेपन से हुई थी। इस परिप्रेक्ष्य में फफूंद को अब जीवन की नींव के रूप में देखा जा रहा है, न कि केवल अदृश्य सहायक के रूप में।
यह खोज न केवल जलवायु विज्ञान, कृषि और पारिस्थितिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी है, बल्कि यह धरती की नाजुक पारिस्थितिकीय संरचना को पुनः समझने की दिशा में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।