भूमिगत फफूंद नेटवर्क: जलवायु संतुलन का अदृश्य जीवन तंत्र

भूमिगत फफूंद नेटवर्क: जलवायु संतुलन का अदृश्य जीवन तंत्र

धरती की सतह के नीचे फैले जंगलों, घास के मैदानों और कृषि भूमि के नीचे एक विशाल और अदृश्य प्रणाली मौजूद है, जो हमारे पर्यावरण और जलवायु संतुलन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अमेरिकी विकासवादी जीवविज्ञानी टोबी कीर्स को भूमिगत फफूंद नेटवर्क पर उनके क्रांतिकारी शोध के लिए प्रतिष्ठित टायलर पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

मायकोराइज़ल फफूंद और जलवायु नियंत्रण

मायकोराइज़ल फफूंद पौधों की जड़ों से जुड़कर एक व्यापक भूमिगत जाल बनाते हैं। इस जाल के माध्यम से पौधे और फफूंद आपस में पोषक तत्वों का आदान-प्रदान करते हैं। पौधे इन फफूंदों को कार्बन-युक्त शर्करा और वसा प्रदान करते हैं, जबकि फफूंद उन्हें फास्फोरस, नाइट्रोजन जैसे आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।

ये नेटवर्क हर साल लगभग 13 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेते हैं, जो इन्हें पृथ्वी के सबसे प्रभावशाली प्राकृतिक जलवायु नियंत्रकों में से एक बनाता है। यह प्रक्रिया जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जैविक ढाल के रूप में कार्य करती है।

पारंपरिक दृष्टिकोण से परे: फफूंद का नया वैज्ञानिक मूल्यांकन

पारंपरिक रूप से फफूंद को केवल पौधों के सहायक जीव माने जाते थे, लेकिन टोबी कीर्स के शोध ने इस धारणा को बदल दिया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि ये जीव केवल निष्क्रिय सहायक नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदार हैं, जो अपने पर्यावरण के अनुसार प्रतिक्रिया करते हैं। उनके कार्यों ने मायकोराइज़ल नेटवर्क को जैविक आधारभूत संरचना के रूप में पुनः परिभाषित किया है, जो धरती की पारिस्थितिक प्रणालियों की जीवन रेखा के समान है।

भूमिगत जैविक बाजार: एक अद्भुत खोज

2011 में किए गए एक ऐतिहासिक अध्ययन में कीर्स ने यह दिखाया कि फफूंद बाजार की तरह व्यवहार करते हैं, यानी वे आपूर्ति और मांग के अनुसार पोषक तत्वों का स्थानांतरण करते हैं। यदि किसी पौधे को अधिक पोषण की आवश्यकता होती है, तो फफूंद उससे अधिक कार्बन प्राप्त करने की अपेक्षा करते हैं। यह पूरा व्यवहार बिना मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र के होता है, जो जीवों में सूचना प्रसंस्करण की नई संभावनाओं को सामने लाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मायकोराइज़ल फफूंद पौधों और मिट्टी के बीच पोषक तत्वों का आदान-प्रदान कराते हैं।
  • ये नेटवर्क प्रतिवर्ष लगभग एक-तिहाई जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन जितना कार्बन सोखते हैं।
  • “अर्बस्क्यूल्स” नामक पेड़-जैसे संरचनाएं फफूंद में होती हैं, जहां पोषक तत्वों का आदान-प्रदान होता है।
  • भूमिगत जैव विविधता के कई हॉटस्पॉट संरक्षित पारिस्थितिकी क्षेत्रों से बाहर हैं।

भूमिगत जैव विविधता का संरक्षण

हाल ही में कीर्स ने वैश्विक “अंडरग्राउंड एटलस” के निर्माण में सह-नेतृत्व किया, जिसमें मायकोराइज़ल फफूंद की वैश्विक उपस्थिति को मैप किया गया। इस अध्ययन से यह उजागर हुआ कि फफूंद जैव विविधता से समृद्ध कई क्षेत्र संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हैं। इस मुद्दे को हल करने हेतु कीर्स ने “सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ अंडरग्राउंड नेटवर्क्स” की स्थापना की, जो नीति-निर्माण में फफूंद को शामिल करने और वैज्ञानिकों को इन अदृश्य पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिए प्रशिक्षित करने का कार्य कर रही है।

टोबी कीर्स का कार्य हमें इस बात का स्मरण कराता है कि पृथ्वी की सतह के नीचे एक अदृश्य लेकिन अत्यंत प्रभावशाली पारिस्थितिक तंत्र विद्यमान है, जिसकी रक्षा करना जलवायु और जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यावश्यक है।

Originally written on January 14, 2026 and last modified on January 14, 2026.

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