भारत–GCC मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति: वार्ता प्रारंभ करने के लिए ToR पर हस्ताक्षर
भारत ने छह देशों वाले गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए Terms of Reference (ToR) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के सबसे बड़े क्षेत्रीय व्यापार भागीदार के साथ आर्थिक संबंधों को और गहरा करने की रणनीति का हिस्सा है।
ToR का अर्थ और भूमिका
ToR (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) वह दस्तावेज़ है जो प्रस्तावित समझौते के दायरे, ढांचे और प्रक्रिया को औपचारिक रूप देता है। इसके ज़रिए अब दोनों पक्ष शुल्क कटौती, बाजार पहुंच और नियामकीय सहयोग जैसे मुद्दों पर औपचारिक वार्ताएं शुरू कर सकते हैं।
GCC में बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। यह समूह भारत का सबसे बड़ा क्षेत्रीय व्यापारिक साझेदार है।
भारत–GCC व्यापार संबंधों का महत्व
GCC के साथ भारत का व्यापारिक रिश्ता अत्यंत रणनीतिक है। यह समूह भारत के वैश्विक व्यापार का 15% से अधिक योगदान करता है।
- भारत की GCC को निर्यात लगभग $57 अरब डॉलर का है।
- वहीं, भारत का आयात—मुख्यतः कच्चा तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल्स—लगभग $122 अरब डॉलर का है।
- पिछले 5 वर्षों में भारत–GCC व्यापार औसतन 15% की वार्षिक दर से बढ़ा है।
भारत सरकार के लक्ष्य और प्राथमिकताएँ
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रस्तावित FTA भारत और GCC के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र:
- खाद्य प्रसंस्करण
- अवसंरचना
- पेट्रोकेमिकल्स
- सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT)
- सेवा क्षेत्र
इसके अतिरिक्त, भारतीय श्रमिकों और पेशेवरों के लिए वीज़ा, निवेश प्रवाह और गतिशीलता से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख एजेंडे में होंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- GCC में छह पश्चिम एशियाई देश शामिल हैं: बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब और UAE।
- ToR (Terms of Reference) FTA वार्ता की प्रक्रिया और दायरे को निर्धारित करता है।
- GCC, भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 15% से अधिक हिस्सा रखता है।
- भारत का UAE के साथ व्यापक व्यापार समझौता पहले ही लागू है; ओमान के साथ समझौता भी अंतिम चरण में है।
रुकी हुई वार्ताओं का पुनः प्रारंभ
भारत और GCC के बीच FTA पर वार्ताएं पहले भी शुरू हुई थीं, लेकिन GCC द्वारा सभी बाहरी व्यापार वार्ताओं को रोकने के कारण यह प्रक्रिया स्थगित हो गई थी।
हाल ही में भारत–UAE व्यापार समझौते के बाद पुनः गतिशीलता आई। हालांकि GCC के सभी सदस्य देशों की सहमति जुटाना एक चुनौती था, फिर भी अब वार्ता का औपचारिक आरंभ भारत की FTAs के विस्तार रणनीति का अहम हिस्सा है।
यह रणनीति भारत को निर्यात बढ़ाने, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लक्ष्यों की ओर अग्रसर करती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अधिक है।
भारत–GCC FTA की यह पहल न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि भूराजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर भी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।