भारत स्टील 2026: हरित उत्पादन और आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की वैश्विक पहल
भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘भारत स्टील 2026’ सम्मेलन 16–17 अप्रैल को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी वैश्विक इस्पात निर्माण संवाद को आकार देने के उद्देश्य से आयोजित हो रहा है, एक ऐसे समय में जब दुनिया भर में सतत उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और तकनीकी नवाचार इस क्षेत्र को नया स्वरूप दे रहे हैं।
इस्पात क्षेत्र का रणनीतिक महत्व
यह सम्मेलन भारत की उस महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जिसमें इस्पात को दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की रीढ़ के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार इस्पात को अवसंरचना, विनिर्माण और औद्योगिक विस्तार की धुरी बताया है।
भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश बन चुका है और यह क्षेत्र $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तथा औद्योगिक आत्मनिर्भरता को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
उत्पादन लक्ष्य और नीतिगत दिशा
भारत सरकार ने 2030 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 500 मिलियन टन इस्पात उत्पादन क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है।
देश में अवसंरचना, आवास, रेलवे, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग इस विस्तार को प्रेरित कर रही है।
हालांकि, नीति-निर्माता इस बात पर भी बल दे रहे हैं कि इस विस्तार के साथ-साथ कच्चे माल की स्थायी आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स की दक्षता, और नियमात्मक स्थिरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बेनिफिसिएशन, लॉजिस्टिक सुधार और आयातित कोकिंग कोल पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
नवाचार, पीएलआई योजना और ग्रीन स्टील पर जोर
‘भारत स्टील 2026’ का प्रमुख विषय होगा नवाचार आधारित आधुनिकीकरण।
विशेष इस्पात के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के माध्यम से भारत उच्च गुणवत्ता वाले स्टील जैसे कि रक्षा, एयरोस्पेस और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए उपयुक्त स्टील के उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है।
सम्मेलन में ग्रीन स्टील भी केंद्र में रहेगा, जिसके लिए इस्पात मंत्रालय द्वारा एक विशेष ‘ग्रीन स्टील रोडमैप’ तैयार किया गया है। इसमें शामिल हैं:
- ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग
- कार्बन कैप्चर तकनीक
- स्क्रैप उपयोग में वृद्धि
- निम्न उत्सर्जन उत्पादन तकनीकें
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत स्टील 2026 का आयोजन इस्पात मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
- भारत ने 2030 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 500 मिलियन टन इस्पात उत्पादन क्षमता का लक्ष्य तय किया है।
- PLI योजना का उद्देश्य विशेष और मूल्य वर्धित स्टील उत्पादन को बढ़ावा देना है।
- ग्रीन स्टील का अर्थ है निम्न-उत्सर्जन उत्पादन तकनीकों का उपयोग।
वैश्विक सहभागिता और विकसित भारत का लक्ष्य
भारत स्टील 2026 में 700 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है, जिनमें शामिल होंगे:
- वैश्विक इस्पात निर्माता
- तकनीकी कंपनियाँ
- सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयाँ
- स्टार्टअप्स और निवेशक
डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन और एआई आधारित दक्षता जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए यह सम्मेलन ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना से जुड़ता है। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक इस्पात बाजार में एक प्रतिस्पर्धी, सतत और नवोन्मेषी उत्पादक के रूप में स्थापित करना है।
‘भारत स्टील 2026’ भारत की औद्योगिक नीति, पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और तकनीकी नेतृत्व का प्रतीक बनकर उभरेगा।