भारत सरकार ने 100 मिलीग्राम से अधिक की निमेसुलाइड मौखिक दवाओं पर लगाया प्रतिबंध
जन स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने निमेसुलाइड (Nimesulide) की 100 मिलीग्राम से अधिक की सभी मौखिक दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय 31 दिसंबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया, जिसमें दवा के यकृत पर दुष्प्रभाव (liver toxicity) और सुरक्षित विकल्पों की उपलब्धता का हवाला दिया गया है। यह कदम भारत की दवा नियामकीय प्रणाली को और अधिक सतर्क और जनहित केंद्रित बनाने की दिशा में उठाया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना और कारण
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 100 मिलीग्राम से अधिक की निमेसुलाइड मौखिक खुराक जन स्वास्थ्य के लिए संभावित रूप से जोखिमपूर्ण है। पहले से ही यह दवा 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और पशु चिकित्सा उपयोग के लिए प्रतिबंधित है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सिफारिश के बाद लिया गया, जो भारत में औषधियों से जुड़ी तकनीकी सलाह देने वाली शीर्ष संस्था है।
सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ और नियामकीय पृष्ठभूमि
निमेसुलाइड एक गैर-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है जिसका उपयोग बुखार और दर्द कम करने के लिए किया जाता है। हालांकि, यह दवा लंबे समय से यकृत विषाक्तता के जोखिम के कारण वैश्विक स्तर पर जांच के घेरे में रही है। भारत में इसका उपयोग पहले ही सीमित कर दिया गया है, और अब उच्च खुराक पर पूर्ण प्रतिबंध, एक सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
चूंकि बाज़ार में बेहतर सुरक्षा प्रोफ़ाइल वाली वैकल्पिक दवाएं पहले से मौजूद हैं, इसलिए इस प्रतिबंध से उपचार के विकल्पों में कोई कमी नहीं आएगी।
भारतीय फार्मा उद्योग पर प्रभाव
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, निमेसुलाइड दवा बाजार (फिक्स्ड डोज़ संयोजनों सहित) का आकार लगभग ₹500 करोड़ है। डॉ रेड्डी लैब्स, सिप्ला, एंमक्योर और एल्केम जैसी प्रमुख कंपनियों के ब्रांड इस दवा पर आधारित हैं। विश्लेषकों के अनुसार, भले ही 100 मिलीग्राम से ऊपर की खुराक की बिक्री सीमित रही हो, लेकिन सरकार का यह कदम थोड़े से संभावित जोखिम को भी समाप्त करने की नीति को दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- निमेसुलाइड एक NSAID है जिसमें लीवर टॉक्सिसिटी का जोखिम होता है।
- भारत सरकार ने 100 मिलीग्राम से अधिक की मौखिक खुराक पर प्रतिबंध लगाया है।
- यह दवा पहले से ही 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों और पशु चिकित्सा के लिए प्रतिबंधित है।
- ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) दवाओं पर सरकार को तकनीकी सलाह देता है।
नीति संकेत और उद्योग की प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध केंद्र सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें मरीज की सुरक्षा को व्यावसायिक हितों से ऊपर रखा गया है। उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि उच्च खुराक की कुछ उत्पादों को भले ही पहले नियामकीय मंजूरी मिली हो, लेकिन उनकी बिक्री सीमित रही है।
यह निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी संभावित रूप से हानिकारक खुराक अब कानूनी रूप से उपलब्ध नहीं होगी। यह भारत की दवा नीति को सावधानी-आधारित जन स्वास्थ्य ढांचे के अनुरूप लाता है और दवाओं की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।