भारत सरकार की नई मार्केट एक्सेस सपोर्ट योजना: ₹4,531 करोड़ से छह वर्षों में निर्यातकों को मिलेगा बढ़ावा

भारत सरकार की नई मार्केट एक्सेस सपोर्ट योजना: ₹4,531 करोड़ से छह वर्षों में निर्यातकों को मिलेगा बढ़ावा

भारत सरकार ने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मार्केट एक्सेस सपोर्ट (MAS) योजना की शुरुआत की है। कुल ₹4,531 करोड़ की लागत वाली यह योजना अगले छह वर्षों में भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाज़ारों तक बेहतर पहुंच दिलाने और निर्यात में विविधता लाने पर केंद्रित है।

निर्यात संवर्धन मिशन के अंतर्गत MAS

MAS योजना ₹25,000 करोड़ के निर्यात संवर्धन मिशन का एक प्रमुख स्तंभ है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पूर्व में स्वीकृति दी गई थी। इस योजना का संचालन वाणिज्य विभाग द्वारा किया जाएगा और इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), प्रथम बार निर्यात करने वालों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में काम करने वाली फर्मों को प्राथमिकता दी गई है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस योजना में MSME के लिए स्पष्ट पूर्वाग्रह है, जिससे लाभार्थियों में विविधता लाई जा सके और कुछ गिने-चुने क्षेत्रों में निर्यात केंद्रित होने की प्रवृत्ति को कम किया जा सके।

खरीदार संपर्क और बाज़ार विविधीकरण पर विशेष ज़ोर

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अनुसार, MAS का मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच संपर्क को मजबूत करना और भारत की वैश्विक बाजारों में दृश्यता को बढ़ाना है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियों के लिए वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान की जाएगी:

  • बायर-सेलर मीट्स
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी
  • भारत में आयोजित मेगा रिवर्स बायर-सेलर मीट्स
  • प्राथमिकता और उभरते बाज़ारों में व्यापार प्रतिनिधिमंडल

सरकार एक 3–5 वर्षीय रोलिंग कैलेंडर बनाएगी जिससे घटनाओं की बेहतर योजना और निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।

MAI बकाया भुगतान और आयोजन मानदंड

सरकार ने पूर्व की मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव (MAI) योजना के तहत लगभग ₹330 करोड़ के बकाया भुगतान को भी मंजूरी दे दी है। MAS के अंतर्गत यह अनिवार्य किया गया है कि समर्थित आयोजनों में कम से कम 35% भागीदारी MSMEs की हो। इसके अलावा नई भौगोलिक दिशाओं और छोटे बाजारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रत्येक व्यापार प्रतिनिधिमंडल में कम से कम 50 प्रतिभागियों की भागीदारी का मानक तय किया गया है, हालांकि बाज़ार की स्थितियों और रणनीतिक महत्व के अनुसार इसमें लचीलापन रहेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मार्केट एक्सेस सपोर्ट (MAS) योजना की कुल लागत ₹4,531 करोड़ है और अवधि 6 वर्ष है।
  • यह ₹25,000 करोड़ के निर्यात संवर्धन मिशन का हिस्सा है।
  • प्रत्येक इवेंट में न्यूनतम 35% MSME भागीदारी अनिवार्य है।
  • MAI योजना के ₹330 करोड़ के बकाया भुगतान को मंजूरी दी गई है।

छोटे निर्यातकों और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा

छोटे निर्यातकों के लिए विशेष सहायता की व्यवस्था की गई है। ₹75 लाख तक का वार्षिक निर्यात टर्नओवर रखने वाले निर्यातकों को हवाई यात्रा व्यय में आंशिक सब्सिडी दी जाएगी। आयोजन-स्तर पर वित्तीय सीमा और लागत साझेदारी अनुपात को प्राथमिकता क्षेत्रों और बाज़ारों के अनुसार तार्किक रूप से पुनर्गठित किया गया है।

MAS योजना का पूरा संचालन एक समर्पित डिजिटल पोर्टल के माध्यम से होगा, जिसमें आयोजन सूची, प्रस्ताव प्रस्तुत करना, फंड रिलीज़ और निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएँ डिजिटल रूप में संचालित होंगी। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्यातकों की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा।

MAS योजना भारत के निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सशक्त बनाएगी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

Originally written on January 3, 2026 and last modified on January 3, 2026.

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