भारत-वियतनाम सहयोग: जनजातीय विकास में नई दिशा
भारत और वियतनाम ने 20 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय मंत्रीस्तरीय बैठक के दौरान जनजातीय और जातीय समुदायों के विकास में सहयोग को मजबूत किया है। यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों का प्रतीक है और उनके व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उच्च स्तरीय मंत्रीस्तरीय वार्ता
इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और वियतनाम के जातीय एवं धार्मिक मामलों के मंत्री दाओ न्गोक डुंग ने की। इससे पहले दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा हो चुकी थी, जिसमें जनजातीय विकास से जुड़ी नीतियों, योजनाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस मंत्रीस्तरीय संवाद का उद्देश्य सहयोग को संस्थागत रूप देना और इसे उच्च स्तर तक विस्तारित करना था।
सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध
भारत ने वियतनाम को अपनी “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के तहत एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध काफी गहरे हैं, जो साझा सभ्यतागत मूल्यों और बौद्ध परंपराओं से जुड़े हैं। सारनाथ से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का वियतनाम में प्रदर्शन इस सांस्कृतिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
बैठक में आजीविका संवर्धन, सतत कृषि, वन उत्पादों में मूल्य संवर्धन, कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। वियतनाम ने अपने 54 मान्यता प्राप्त जातीय समूहों के समावेशी विकास के लिए बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया। दोनों देशों ने एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी 2026 में 10 वर्ष पूर्ण कर रही है।
- वियतनाम में 54 मान्यता प्राप्त जातीय समूह हैं।
- भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संबंधों को मजबूत करती है।
- भारत का जनजातीय कार्य मंत्रालय जनजातीय समुदायों के विकास के लिए कार्य करता है।
सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा
दोनों देशों ने सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoC) के मसौदे की समीक्षा की। वियतनाम ने इसे मंजूरी दे दी है और भारतीय मंत्री को हस्ताक्षर के लिए आमंत्रित किया है। इस पहल से स्पष्ट है कि दोनों देश पारस्परिक विश्वास और निरंतर संवाद के माध्यम से जनजातीय और जातीय समुदायों के समावेशी विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।
यह सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक नया मॉडल भी प्रस्तुत करेगा, जो अन्य देशों के लिए प्रेरणा बन सकता है।