भारत-रूस व्यापार विस्तार: समुद्री और औषधीय उत्पादों पर विशेष जोर

भारत-रूस व्यापार विस्तार: समुद्री और औषधीय उत्पादों पर विशेष जोर

भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर पर ले जाने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की हालिया बैठक मास्को में हुई, जिसमें बाजार तक बेहतर पहुँच, नियामकीय प्रक्रियाओं में सरलता और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई। इस बैठक का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

समुद्री और औषधीय उत्पादों में बाजार पहुंच की प्राथमिकताएँ

भारत ने रूस से आग्रह किया कि समुद्री उत्पादों के निर्यात के लिए घरेलू संस्थानों को प्रमाणन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। फिलहाल इन उत्पादों की संभावनाएँ तो बड़ी हैं, परंतु अनुमोदन में विलंब निर्यात वृद्धि को बाधित कर रहा है। इसके साथ ही, भारत ने औषधीय उत्पादों के लिए समयबद्ध पंजीकरण और पारदर्शी नियामक प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया। इन सुधारों से भारतीय दवाओं को रूसी बाजार में व्यापक पहुंच मिल सकती है।

आर्थिक सहयोग का नया प्रोटोकॉल

मास्को में हुई चर्चाओं के दौरान दोनों देशों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग पर एक नया व्यापक प्रोटोकॉल भी हस्ताक्षरित किया। यह ढांचा विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा, जिससे व्यापार प्रवाह को सुचारु बनाया जा सकेगा। इस पहल का मकसद न केवल व्यापार को बढ़ावा देना है, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और गहरा करना भी है।

वस्तुओं और सेवाओं में विविधीकरण के अवसर

कार्य समूह की बैठक में इंजीनियरिंग वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, वस्त्र, कृषि और चमड़े जैसे क्षेत्रों को भविष्य के व्यापार विस्तार के लिए संभावित माना गया। भारत ने बताया कि स्मार्टफोन, वाहन, कार्बनिक रसायन और रत्न-जवाहरात जैसे क्षेत्रों में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता रूस की विविधीकरण योजना को मजबूती दे सकती है।सेवा क्षेत्र में, भारत ने सूचना-प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रचनात्मक उद्योगों में रूस की अधिक भागीदारी का स्वागत किया तथा कुशल पेशेवरों की गतिशीलता को सरल बनाने की मांग रखी।

निवेश, भुगतान और प्रौद्योगिकी सहयोग

भारत ने रूस की उस रुचि का स्वागत किया जिसमें वह द्विपक्षीय निवेश संधि को शीघ्र पूर्ण करना चाहता है ताकि निवेश प्रवाह को सुरक्षित और पूर्वानुमेय बनाया जा सके। साथ ही, दोनों देशों ने छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए विशेष भुगतान समाधान विकसित करने पर सहमति जताई जिससे लेन-देन की बाधाएँ कम हों। भारत ने अपने “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर” (GCC) पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन भी किया, जो विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, डिज़ाइन और साझा सेवाओं के क्षेत्र में रूस को दीर्घकालिक व्यावसायिक समर्थन प्रदान कर सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 25 अरब डॉलर का है।
  • 2030 तक 100 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • समुद्री और औषधीय उत्पाद व्यापार वृद्धि के प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • यह चर्चा मास्को में हुई 26वीं कार्य समूह बैठक के दौरान संपन्न हुई।

भारत और रूस के बीच बढ़ता यह आर्थिक सहयोग न केवल दोनों देशों की व्यापारिक क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में उनकी पारस्परिक निर्भरता को भी गहराई प्रदान करेगा। भविष्य में यदि नियामकीय अड़चनें कम होती हैं और नई तकनीकी साझेदारी को गति मिलती है, तो यह साझेदारी एशिया-यूरोप के बीच व्यापारिक पुल के रूप में उभर सकती है।

Originally written on November 14, 2025 and last modified on November 14, 2025.

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