भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन: रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर नई दिशा

भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन: रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर नई दिशा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को दो दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत पहुंचेंगे। यह यात्रा भारत और रूस के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाला यह वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों की दीर्घकालिक साझेदारी की पुनर्पुष्टि करेगा और सहयोग के नए क्षेत्रों की रूपरेखा तय करेगा।

वार्षिक शिखर सम्मेलन का एजेंडा

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग की प्रगति की समीक्षा करना और “विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” (Special and Privileged Strategic Partnership) के भविष्य की दिशा निर्धारित करना है। चर्चा के केंद्र में क्षेत्रीय और वैश्विक परिदृश्य से जुड़े मुद्दे होंगे, जिन पर भारत और रूस लंबे समय से कूटनीतिक संवाद बनाए हुए हैं।

रक्षा सहयोग पर केंद्रित वार्ता

रक्षा क्षेत्र इस दौरे का सबसे प्रमुख विषय रहेगा। रिपोर्टों के अनुसार, भारत अतिरिक्त S-400 सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम खरीदने पर विचार कर रहा है। यह निर्णय भारत की उन्नत वायु रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ करेगा। S-400 प्रणाली पहले से ही भारतीय वायुसेना के रणनीतिक तैनाती कार्यक्रम का हिस्सा है और इसकी प्रभावशीलता हाल की सैन्य अभ्यासों में देखी गई है। इस सहयोग से दोनों देशों के रक्षा संबंध और गहरे होने की संभावना है।

ऊर्जा सहयोग और आर्थिक समझौते

ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक बातचीत होने की उम्मीद है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से ऊर्जा स्रोतों की खरीद और संयुक्त परियोजनाओं पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। दोनों देश हाइड्रोकार्बन, परमाणु ऊर्जा और तेल-गैस क्षेत्र में नए निवेश अवसर तलाश रहे हैं। बैठक के दौरान कई मंत्रालयों और कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों के बीच समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर की संभावना है, जिससे आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यह यात्रा 4–5 दिसंबर को भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के अंतर्गत होगी।
  • भारत और रूस के बीच साझेदारी को “विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” कहा जाता है।
  • प्रमुख विषयों में रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं।
  • भारत अतिरिक्त S-400 मिसाइल प्रणालियों की खरीद पर विचार कर रहा है।

भू-राजनीतिक संवाद और यूक्रेन संघर्ष

दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भी विचार-विमर्श करेंगे, जिसमें यूक्रेन संघर्ष का विषय क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों के संदर्भ में उठाया जा सकता है। यह बैठक भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) की नीति को दर्शाती है, जिसमें वह पारंपरिक साझेदारों के साथ संतुलित सहयोग बनाए रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। इस यात्रा से भारत-रूस संबंधों में एक नई ऊर्जा और दिशा मिलने की संभावना है।

Originally written on November 29, 2025 and last modified on November 29, 2025.

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