भारत-रूस के बीच परमाणु ऊर्जा साझेदारी को नई दिशा
भारत और रूस अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत करने की तैयारी में हैं। आगामी वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु सहयोग पर गहन चर्चा होने जा रही है, जिसमें छोटे और मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs), परमाणु ईंधन चक्र तकनीक, और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की प्रगति प्रमुख विषय होंगे। यह बैठक दोनों देशों के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए अध्याय की रूपरेखा तैयार करेगी।
SMR और नई पीढ़ी की तकनीक पर फोकस
रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी रोसाटॉम (Rosatom) के महानिदेशक ने हाल ही में मुंबई में भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने छोटे और मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के संयुक्त विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। SMR तकनीक पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में कम लागत, लचीलापन और अधिक सुरक्षा प्रदान करती है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने परमाणु ईंधन चक्र के विभिन्न पहलुओं जैसे समृद्ध ईंधन आपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन और अनुसंधान आधारित सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया।
कुडनकुलम परियोजना में निरंतर प्रगति
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत-रूस परमाणु सहयोग का सबसे प्रमुख उदाहरण है। इसकी पहली दो इकाइयाँ पहले से ही दक्षिण भारत को बिजली की आपूर्ति कर रही हैं। तीसरी इकाई प्री-कमीशनिंग चरण में पहुँच चुकी है और सुरक्षा प्रणाली के परीक्षण जल्द ही शुरू होंगे। चौथी इकाई पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि पाँचवीं और छठी इकाइयों के लिए उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना का कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना का तीसरा चरण भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।
कुडनकुलम से परे सहयोग के नए अवसर
भारत और रूस अब अपने सहयोग को कुडनकुलम से आगे बढ़ाकर विविध क्षेत्रों में विस्तारित करने की योजना बना रहे हैं। दोनों देश छोटे रिएक्टरों को उन क्षेत्रों में तैनात करने की संभावना तलाश रहे हैं जहाँ बिजली ग्रिड की क्षमता कम है। इसके अलावा, उच्च दक्षता वाले रिएक्टरों के डिजाइन पर संयुक्त अनुसंधान और परमाणु उपकरणों के अधिकतम स्थानीय उत्पादन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे न केवल लागत घटेगी बल्कि भारत के घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कुडनकुलम भारत का सबसे बड़ा परिचालन परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
- इकाई 1 और 2 को क्रमशः 2013 और 2016 में राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा गया था।
- SMR तकनीक मॉड्यूलर निर्माण, कम लागत और बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है।
- भारत और रूस पूरे परमाणु ईंधन चक्र में सहयोग करते हैं।
ऊर्जा साझेदारी का रणनीतिक महत्व
आगामी दिसंबर शिखर सम्मेलन से यह उम्मीद की जा रही है कि परमाणु ऊर्जा को भारत-रूस सहयोग का प्रमुख स्तंभ घोषित किया जाएगा। भारत में बढ़ती बिजली की मांग और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए, परमाणु ऊर्जा देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं रूस, अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और ईंधन आपूर्ति क्षमता के चलते, भारत की अगली परमाणु ऊर्जा विस्तार योजना में एक प्रमुख सहयोगी की भूमिका निभाने के लिए तैयार है चाहे वह बड़े रिएक्टर हों या नई पीढ़ी के मॉड्यूलर सिस्टम।