भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन 2026: परमाणु ऊर्जा, अनुसंधान और कार्बन सहयोग में नई साझेदारी
27 जनवरी 2026 को संपन्न भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद जारी “संयुक्त समग्र रणनीतिक एजेंडा” में विज्ञान-आधारित रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है। विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने का संकल्प व्यक्त किया गया।
भारत–यूरोटॉम समझौते के अंतर्गत सहयोग का विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ ने जुलाई 2020 में हुए भारत–Euratom समझौते के अंतर्गत परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अनुसंधान सहयोग को दोहराया। भविष्य में जिन क्षेत्रों में साझेदारी को गहन किया जाएगा, उनमें उन्नत डिटेक्टर सामग्री, विकिरण सुरक्षा, परमाणु सुरक्षा तथा परमाणु ऊर्जा के गैर-विद्युत उपयोग शामिल हैं।
विशेष उल्लेख रेडियो-फार्मास्युटिकल्स का हुआ, जिनका उपयोग आधुनिक चिकित्सा में निदान और कैंसर उपचार के लिए तेजी से बढ़ रहा है।
ITER और फ्यूजन अनुसंधान में सहभागिता
भारत और यूरोपीय संघ ने ITER (इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर) में सहयोग को और सशक्त बनाने का निर्णय लिया। यह वैश्विक परमाणु संलयन (fusion) ऊर्जा परियोजना भविष्य की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दोनों पक्ष इस परियोजना में वैज्ञानिक आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और संयुक्त योगदान के माध्यम से फ्यूजन तकनीक को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी करेंगे।
Horizon Europe और व्यापक अनुसंधान सहयोग
Horizon Europe, जो यूरोपीय संघ का प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार वित्तपोषण कार्यक्रम है, उसके तहत भारत और EU के बीच सहयोग को “गहरा” करने पर बल दिया गया है। साझेदारी के क्षेत्र होंगे—ऊर्जा, जल, कृषि-खाद्य, स्वास्थ्य, सेमीकंडक्टर्स, जैवप्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री।
संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सह-वित्तपोषण व्यवस्था और संगठित अनुसंधान कॉल जैसी प्रणालियों के माध्यम से दोनों पक्षों के नवाचार तंत्र को बल मिलेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Euratom (European Atomic Energy Community) यूरोपीय परमाणु अनुसंधान और सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
- ITER वैश्विक परमाणु संलयन परियोजना है, जिसका उद्देश्य फ्यूजन ऊर्जा की व्यवहार्यता सिद्ध करना है।
- Horizon Europe यूरोपीय संघ का प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रम है।
- रेडियो-फार्मास्युटिकल्स का उपयोग विकिरण आधारित चिकित्सा निदान और उपचार में होता है।
CBAM और कार्बन सहयोग ढांचा
भारत और यूरोपीय संघ के साझा बयान में कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर चर्चा हुई, जो भारत के लिए एक चिंता का विषय रहा है। यह तंत्र EU में आयातित लोहे-स्टील जैसे कार्बन-गहन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाता है।
भारत सरकार के अनुसार, CBAM पर चर्चा में निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी:
- MFN (Most Favoured Nation) सिद्धांत के अनुरूप लचीला दृष्टिकोण
- विकासशील देशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता
- कार्बन मूल्य निर्धारण और प्रमाणन मानकों की पारस्परिक मान्यता
- वैश्विक कार्बन सहयोग की दिशा में तकनीकी समन्वय और समर्थन
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच उभरते वैश्विक पर्यावरणीय और तकनीकी मानकों के बीच सामंजस्य बैठाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
यह शिखर सम्मेलन केवल द्विपक्षीय कूटनीति का प्रतीक नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा, विज्ञान और व्यापारिक संरचनाओं के लिए आधारशिला सिद्ध हो सकता है।