भारत–यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई: यूरोपीय आयोग अध्यक्ष की भारत यात्रा
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शुक्रवार को चार दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, रक्षा और प्रतिभा गतिशीलता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को सशक्त बनाने के उद्देश्य से हो रही है। बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच यह यात्रा दोनों पक्षों की रणनीतिक साझेदारी को ऊंचे स्तर पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भारत–ईयू शिखर सम्मेलन से पूर्व उच्च स्तरीय संवाद
वॉन डेर लेयेन की यह यात्रा 27 जनवरी को होने वाले भारत–ईयू शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रही है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ भी विचार-विमर्श करेंगी।
दोनों यूरोपीय नेता गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी होंगे, जो इस रणनीतिक साझेदारी की राजनीतिक महत्ता को रेखांकित करता है।
मुक्त व्यापार समझौता और आर्थिक सहयोग
इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के समापन की घोषणा हो सकती है, जो लंबे समय से लंबित है। इस समझौते का उद्देश्य आपसी बाजार पहुंच को बढ़ाना, शुल्कों को कम करना और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुदृढ़ बनाना है।
वर्तमान में यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा वस्तु-व्यापार साझेदार है। 2024–25 के वित्तीय वर्ष में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो दोनों पक्षों के बीच आर्थिक परस्पर निर्भरता को दर्शाता है।
रक्षा साझेदारी और प्रतिभा गतिशीलता ढांचा
व्यापार के अलावा, दोनों पक्ष एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देने पर चर्चा कर रहे हैं, जिसके अंतर्गत रक्षा निर्माण, प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार होगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव एक कौशल गतिशीलता ढांचा है, जो भारतीय पेशेवरों, छात्रों और अधिकारियों की यूरोप में कानूनी प्रवासन को सुगम बनाने और यूरोपीय देशों में कौशल की कमी को दूर करने की दिशा में कार्य करेगा। यह भारत की श्रमशक्ति को भी वैश्विक अवसरों से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझेदार है।
- यूरोपीय आयोग (European Commission) यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा है।
- भारत और ईयू 2004 से औपचारिक रणनीतिक साझेदार हैं।
- मुक्त व्यापार समझौते (FTA) शुल्कों को कम कर सीमा-पार व्यापार को बढ़ावा देते हैं।
साझा दृष्टिकोण और दीर्घकालिक रणनीति
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को भारत–ईयू रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण को दिशा देने वाला बताया है, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित है।
जलवायु परिवर्तन, तकनीकी शासन और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे वैश्विक विषयों पर दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सहमति इस साझेदारी को व्यापक और दूरदर्शी बनाने में मदद कर रही है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यात्रा से इस बहुपक्षीय संबंध में नई गति और उद्देश्य की भावना जुड़ने की उम्मीद है।