भारत में 3D प्रिंटिंग से बने स्वदेशी ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन की शुरुआत: मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव
भारतीय वैज्ञानिकों ने मौसम अवलोकन प्रणाली में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 3D प्रिंटिंग तकनीक से निर्मित भारत के पहले स्वदेशी ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) का निर्माण सफलतापूर्वक कर लिया गया है और इनकी पहली खेप फरवरी 2026 से दिल्ली में तैनात की जाएगी। यह पहल मौसम विज्ञान अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
मिशन मौसमी और संस्थागत नेतृत्व
इस पहल का नेतृत्व भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) द्वारा किया जा रहा है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। यह परियोजना ₹2,000 करोड़ की मिशन मौसमी योजना का हिस्सा है जिसका उद्देश्य भारत की मौसम वैज्ञानिक क्षमताओं को आधुनिक बनाना और विशेषकर शहरी तथा जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में डेटा गैप को समाप्त करना है। यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के विजन को मूर्त रूप देने वाली है।
तकनीक और डिज़ाइन की विशेषताएँ
नए AWS पूरी तरह से भारत में निर्मित हैं और इनका निर्माण 3D प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से किया गया है। ये स्टेशन स्वचालित रूप से तापमान, आर्द्रता, वर्षा, पवन गति आदि डेटा को रिकॉर्ड करते हैं और रीयल-टाइम में ट्रांसमिट करते हैं।
इनकी प्रमुख विशेषताएँ:
- कम लागत में निर्माण,
- लचीलापन पूर्ण डिज़ाइन,
- तेज़ गति से बड़े पैमाने पर तैनाती,
- सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण दूरदराज और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपयुक्त।
तैनाती रणनीति और गुणवत्ता नियंत्रण
दिल्ली इन अत्याधुनिक AWS की तैनाती पाने वाला पहला शहर होगा। इसके बाद मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में अगले छह महीनों के भीतर इन्हें स्थापित किया जाएगा।
सटीकता सुनिश्चित करने हेतु, नए 3D प्रिंटेड AWS को प्रारंभ में मौजूदा मैन्युअल वेधशालाओं के बगल में लगाया जाएगा ताकि उनका परीक्षण, अंशांकन और प्रमाणीकरण किया जा सके। पहले के अनुभवों से मिली सीख के आधार पर नई प्रणाली के लिए गुणवत्ता नियंत्रण को और सख्त किया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मिशन मौसमी एक ₹2,000 करोड़ की राष्ट्रीय योजना है जो भारत के मौसम नेटवर्क को सुदृढ़ करती है।
- ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन बिना मानवीय हस्तक्षेप के मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र और प्रसारित करते हैं।
- नए AWS पूर्णतः 3D प्रिंटिंग तकनीक से भारत में निर्मित हैं।
- सभी उपकरण भारतीय मौसम विभाग (IMD) की सतही प्रयोगशाला से प्रमाणित और BIS द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।
मौसम अवलोकन में अंतिम छोर तक पहुँच
वर्तमान में भारतीय मौसम विभाग (IMD) देशभर में 1,000 से अधिक AWS संचालित करता है, परंतु वैज्ञानिकों के अनुसार यह घनत्व शहरी सूक्ष्म जलवायु (urban microclimates) और जटिल क्षेत्रों जैसे हिमालय के लिए अपर्याप्त है।
3D प्रिंटिंग आधारित नए AWS के आगमन से अंतिम छोर तक डेटा कवरेज को मजबूती मिलेगी और जलवायु में बढ़ती अनियमितताओं के बीच सटीक और स्थानिक मौसम पूर्वानुमान संभव हो सकेगा।
यह तकनीकी उन्नयन भारत को भविष्य में जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन में अधिक सक्षम बनाएगा और वैश्विक मौसम विज्ञान मंचों पर भारत की भूमिका को और सशक्त करेगा।