भारत में पहली बार आयोजित होगा भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक 2026: पश्चिम एशिया में रणनीतिक साझेदारी को नई गति

भारत में पहली बार आयोजित होगा भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक 2026: पश्चिम एशिया में रणनीतिक साझेदारी को नई गति

भारत 31 जनवरी 2026 को “भारत–अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक” (IAFMM) की मेज़बानी करेगा, जो लगभग दस वर्षों के अंतराल के बाद इस प्रमुख कूटनीतिक मंच का पुनरुत्थान है। इस ऐतिहासिक बैठक की अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) संयुक्त रूप से करेंगे, जिसमें अरब लीग के 22 सदस्य देशों के मंत्री या वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह पहली बार है जब नई दिल्ली इस उच्च-स्तरीय संवाद मंच की मेज़बानी कर रहा है, जो भारत की अरब विश्व के साथ गहराते संबंधों का प्रतीक है।

भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की पृष्ठभूमि

IAFMM की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2002 में भारत और अरब लीग के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी, जिसका उद्देश्य एक संरचित संवाद तंत्र को संस्थागत रूप देना था। इसकी पहली मंत्रीस्तरीय बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित की गई थी, जहाँ पांच प्रमुख क्षेत्रों—अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति—में सहयोग को गहराने पर सहमति बनी थी। इस ढांचे को “अरब–भारत सहयोग मंच” के माध्यम से 2008 में और 2013 में और भी मजबूत किया गया।

ऊर्जा, व्यापार और शिक्षा होंगे बैठक के मुख्य केंद्रबिंदु

इस वर्ष की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक सहयोग और शैक्षणिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिए जाने की संभावना है। पश्चिम एशिया भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा भागीदार रहा है, इसलिए तेल और गैस की दीर्घकालिक आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा की जाएगी।

व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल संपर्क, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और अकादमिक साझेदारी के क्षेत्र में नए प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा, जिससे भारत और अरब देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक सहयोग को नया आयाम मिलेगा।

सहभागिता और कूटनीतिक महत्व

सभी 22 अरब देशों के विदेश मंत्री, राज्य मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में भाग लेंगे, जो इस संवाद की सामूहिक प्राथमिकता को दर्शाता है। इस बैठक से एक दिन पहले, 30 जनवरी 2026 को “भारत–अरब वरिष्ठ अधिकारियों की चौथी बैठक” आयोजित की जाएगी, जो एजेंडा तय करने और परिणामों को संकलित करने का कार्य करेगी।

यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हालिया उच्च-स्तरीय मुलाकातों की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जो भारत–गुल्फ रणनीतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • IAFMM की शुरुआत 2002 में भारत और अरब लीग के बीच हुए समझौता ज्ञापन से हुई थी।
  • भारत अरब लीग में एक पर्यवेक्षक (Observer) देश है; अरब लीग के कुल 22 सदस्य देश हैं।
  • पहली IAFMM बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित की गई थी।
  • सहयोग के पाँच प्राथमिक क्षेत्र हैं: अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति।

भारत की अरब क्षेत्र में बढ़ती भूमिका

IAFMM की मेज़बानी करके भारत यह संकेत देना चाहता है कि वह पश्चिम एशिया में एक भरोसेमंद आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। यह मंच राजनीतिक संवाद को आर्थिक प्राथमिकताओं और लोगों के बीच संबंधों के साथ जोड़ने का अवसर प्रदान करता है। यह पहल भारत की “पश्चिम एशिया नीति” को और सशक्त बनाएगी, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं।

Originally written on January 29, 2026 and last modified on January 29, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *