भारत में नागरिक उड्डयन का नया युग: प्रतिवर्ष 100 नए विमानों की योजना और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में बदलाव

भारत में नागरिक उड्डयन का नया युग: प्रतिवर्ष 100 नए विमानों की योजना और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में बदलाव

भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र अब तेज़ी से विस्तार की दिशा में अग्रसर हो गया है। केंद्र सरकार ने अगले 10–15 वर्षों तक प्रतिवर्ष लगभग 100 नए विमानों को घरेलू विमानन कंपनियों में शामिल करने की योजना की घोषणा की है। इस विकास रणनीति का उद्देश्य भारत को वैश्विक हवाई यात्रा के एक सशक्त केंद्र (Hub) में बदलना और विदेशी ट्रांजिट हब्स पर निर्भरता को कम करना है।

विमान बेड़े का विस्तार: दीर्घकालिक क्षमता वृद्धि का संकेत

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत की एयरलाइनों द्वारा हर साल लगभग 100 विमान शामिल किए जाएंगे। फिलहाल भारत के पास 843 वाणिज्यिक विमान हैं। वर्ष 2025 में 80 नए विमान शामिल किए गए, जबकि 2026 में 106 विमान शामिल किए जाने की संभावना है।

यह विस्तार एयर इंडिया समूह, इंडिगो, आकासा एयर और स्टार एयर जैसी प्रमुख एयरलाइनों के बड़े ऑर्डर और विकास योजनाओं पर आधारित है।

नए हवाई अड्डे और प्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर जोर

सरकार का फोकस केवल द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौतों पर नहीं, बल्कि भारतीय हवाई अड्डों को वैश्विक हब के रूप में विकसित करने पर है। नई नीति के तहत देश के उभरते हवाई अड्डों से हब-टू-हब प्रत्यक्ष उड़ानों को बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार की रणनीति में यह भी शामिल है कि निकटवर्ती देशों से यात्रियों को भारत के हवाई अड्डों के माध्यम से जोड़ा जाए, जिससे भारत एक ट्रांजिट केंद्र के रूप में भी उभर सके।

विदेशी ट्रांजिट हब्स से अंतरराष्ट्रीय यातायात वापस लाने की कोशिश

बीते दशकों में भारत से दुनिया के विभिन्न हिस्सों की यात्रा के लिए यात्रियों ने मुख्य रूप से दुबई, दोहा, कोलंबो, सिंगापुर और यूरोपीय हब्स के माध्यम से यात्रा की।

सरकार 2014 से इस रुझान को बदलने की दिशा में कार्य कर रही है। लेकिन मंत्री ने स्वीकार किया कि नॉन-स्टॉप लॉन्ग-हॉल उड़ानों के लिए भारतीय एयरलाइनों के पास चौड़े शरीर वाले (Wide-Body) विमानों की कमी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि कुछ नए विमानों का ऑर्डर दिया जा चुका है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत का वाणिज्यिक विमान बेड़ा फिलहाल 843 विमान का है।
  • 2025 में 80 और 2026 में लगभग 106 विमानों के शामिल होने की योजना है।
  • द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और सीट आवंटन की कानूनी रूपरेखा तय करते हैं।
  • Wide-body विमान लंबी दूरी की प्रत्यक्ष उड़ानों के लिए आवश्यक होते हैं और हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय हब में बदलने में सहायक होते हैं।

भोगापुरम हवाई अड्डे का परीक्षण उड़ान और नए फोकस क्षेत्र

मंत्री भोगापुरम हवाई अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे, जहां एयर इंडिया की परीक्षण उड़ान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह हवाई अड्डा इस गर्मी से चालू होने की संभावना है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत की सीधी उड़ानों के विस्तार में ग्लोबल साउथ और अफ्रीका को प्राथमिकता क्षेत्र माना जा रहा है। हालांकि, कुछ प्रमुख रूट्स पहले से ही द्विपक्षीय समझौतों के तहत पूर्ण क्षमता पर हैं, जिससे नई रणनीति बनाते समय घरेलू एयरलाइनों के हितों को संतुलित करने की आवश्यकता है।

यह विस्तार न केवल भारत की विमानन क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि देश को वैश्विक हवाई नक्शे पर एक प्रमुख भूमिका में लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम सिद्ध हो सकता है।

Originally written on January 7, 2026 and last modified on January 7, 2026.

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