भारत में तकनीक-आधारित मत्स्य पालन की दिशा में बड़ी पहल: तेलंगाना में स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर फार्म और अनुसंधान संस्थान की शुरुआत
भारत ने जलवायु सीमाओं को तोड़ते हुए प्रौद्योगिकी-संचालित मत्स्य पालन की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। तेलंगाना में देश का पहला ट्रॉपिकल आरएएस आधारित रेनबो ट्राउट फार्म और अनुसंधान संस्थान (Smart Green Aquaculture Farm and Research Institute) का उद्घाटन इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो मत्स्य पालन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार का प्रतीक बनकर उभरा है।
उद्घाटन और संस्थागत महत्व
यह परियोजना तेलंगाना के रंगा रेड्डी ज़िले के कंदुकुर मंडल में स्थित है और इसे स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है। 5 जनवरी 2026 को आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह करेंगे। अत्याधुनिक Recirculatory Aquaculture System (RAS) तकनीक पर आधारित यह संस्थान अनुसंधान, प्रशिक्षण और व्यावसायिक उत्पादन का केंद्र बनेगा।
जलवायु सीमाओं को मात देने वाली तकनीक
रेनबो ट्राउट को पारंपरिक रूप से ठंडे पानी की मछली माना जाता है, जो केवल हिमालयी राज्यों में ही पाई जाती है। लेकिन RAS तकनीक की मदद से अब इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु में पूरे वर्ष सफलतापूर्वक पाला जा सकता है। तापमान, ऑक्सीजन स्तर और जल गुणवत्ता जैसे सभी मानकों को नियंत्रित कर, यह फार्म इस बात का प्रमाण है कि अब जलवायु नहीं बल्कि तकनीक भारत में मत्स्य पालन की दिशा तय करेगी।
प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन
यह संस्थान सिर्फ मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह युवा प्रशिक्षुओं के लिए लाइव डेमो प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। युवाओं को स्वचालन, जैव सुरक्षा, और उन्नत मछली पालन तकनीकों में प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिक मत्स्य उद्योग के लिए तैयार किया जाएगा। यह पहल सरकार के 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र में ₹38,572 करोड़ के निवेश के साथ मेल खाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- RAS का पूर्ण रूप है: Recirculatory Aquaculture System
- रेनबो ट्राउट एक ठंडे पानी की मछली है
- भारत का पहला ट्रॉपिकल RAS ट्राउट फार्म तेलंगाना में स्थित है
- 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र में ₹38,000 करोड़ से अधिक का केंद्रीय निवेश हुआ है
कोल्ड वॉटर फिशरीज और राष्ट्रीय रणनीति
भारत में कोल्ड वॉटर फिशरीज, विशेषकर रेनबो ट्राउट पालन, एक प्रीमियम और सतत मत्स्य पालन विकल्प के रूप में उभर रही है। अभी तक इसका केंद्र हिमालयी राज्य जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम रहे हैं। लेकिन इस परियोजना के साथ ट्राउट पालन अब दक्षिण भारत के गर्म इलाकों में भी संभव हो गया है।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में कोल्ड वॉटर फिशरीज क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं, जो इस क्षेत्र को तकनीक-संचालित और बाजारोन्मुखी बनाने की दिशा में राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा हैं।
इस पहल के माध्यम से भारत मत्स्य पालन में केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, नवाचार, कौशल और निर्यात क्षमता को भी प्राथमिकता देकर वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर हो रहा है।