भारत में एफडीआई नियमों में ढील से निवेश को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए विदेशी कंपनियों को राहत दी है। नए नियमों के तहत अब ऐसी विदेशी कंपनियां, जिनमें अधिकतम 10 प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी है, भारत में ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से निवेश कर सकेंगी। यह बदलाव उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा अधिसूचित किया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य निवेश प्रवाह को आसान बनाना है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आवश्यक सुरक्षा उपाय भी बनाए रखे गए हैं।
एफडीआई नीति में प्रमुख बदलाव
संशोधित नीति के अनुसार, यदि किसी विदेशी कंपनी में चीनी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, तो उसे भारत में निवेश के लिए पूर्व सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, यह छूट उन कंपनियों पर लागू नहीं होगी, जो सीधे चीन, हांगकांग या भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में पंजीकृत हैं। इसके अलावा, सभी निवेश संबंधित क्षेत्रीय सीमाओं (sectoral caps) और नियामक शर्तों के अधीन रहेंगे।
लाभकारी स्वामित्व (Beneficial Ownership) की परिभाषा
DPIIT ने “लाभकारी स्वामी” की परिभाषा को भी स्पष्ट किया है। यह उस व्यक्ति या संस्था को दर्शाता है, जो किसी निवेशक कंपनी में वास्तविक नियंत्रण या लाभ का अधिकार रखता है। यह परिभाषा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 2(1)(fa) के अनुरूप है। इसके अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पास किसी कंपनी में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी या लाभ का अधिकार है, तो उसे लाभकारी स्वामी माना जाएगा।
अतिरिक्त अनुपालन और रिपोर्टिंग नियम
हालांकि कुछ निवेश अब ऑटोमैटिक रूट के तहत आएंगे, फिर भी यदि किसी निवेश में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़ी हिस्सेदारी है, तो अतिरिक्त रिपोर्टिंग और निगरानी आवश्यक होगी। DPIIT द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत ऐसे निवेशों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
यह बदलाव अप्रैल 2020 में लागू किए गए कड़े नियमों में संशोधन है, जिन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों को विदेशी अधिग्रहण से बचाने के लिए लागू किया गया था। उस समय प्रेस नोट 3, 2020 के तहत सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। नए नियमों से वैश्विक निवेशकों, विशेषकर प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंड्स को राहत मिलेगी, जिनमें मामूली चीनी हिस्सेदारी होती है। इससे भारत में निवेश का माहौल और बेहतर होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रेस नोट 3 (2020) के तहत सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के लिए सरकारी मंजूरी आवश्यक थी।
- भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं।
- “लाभकारी स्वामी” की परिभाषा PMLA, 2002 के प्रावधानों के अनुरूप है।
- चीन से भारत में अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक लगभग 2.51 अरब डॉलर का एफडीआई आया है।
एफडीआई नीति में यह संशोधन भारत के आर्थिक सुधारों की दिशा में एक संतुलित कदम है, जो निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करता है। इससे भारत वैश्विक निवेश के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।