भारत में ऊन उत्पादन: ग्रामीण आजीविका, क्षेत्रीय विविधता और उद्योग संरचना का संपूर्ण परिदृश्य
ऊन एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक रेशा है जिसका उपयोग शीतकालीन वस्त्रों, कालीनों, फर्श आवरणों तथा अनेक औद्योगिक उत्पादों में होता है। विश्व में दूसरी सबसे बड़ी भेड़ जनसंख्या के साथ, भारत ऊन उत्पादन में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और विश्व में नौवें स्थान पर आता है। यह क्षेत्र संगठित और असंगठित दोनों स्तरों पर कार्यरत है और लाखों लोगों की आजीविका का स्रोत है।
भारत में ऊन उत्पादन और राज्यवार योगदान
वित्तीय वर्ष 2023–24 में भारत का कुल ऊन उत्पादन 3.369 करोड़ किलोग्राम रहा। इसमें से अकेले राजस्थान का योगदान 1.601 करोड़ किलोग्राम (47.53%) रहा, जिससे वह देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बना।
इसके बाद जम्मू और कश्मीर का स्थान रहा, जिसका उत्पादन 0.777 करोड़ किलोग्राम (23.06%) रहा। अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। यह विविधता दर्शाती है कि शुष्क, अर्ध-शुष्क और पहाड़ी क्षेत्रों में भेड़ पालन का व्यापक विस्तार है।
वृद्धि दर और ऊन की श्रेणियाँ
- पंजाब ने ऊन उत्पादन में 22.04% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
- तमिलनाडु (17.19%) और गुजरात (3.20%) अन्य तेजी से बढ़ते राज्य रहे।
भारत में मुख्यतः तीन प्रकार की ऊन उत्पादित होती है:
- कालीन ग्रेड (Carpet Grade) – 85%
- परिधान ग्रेड (Apparel Grade) – 5%
- मोटा ग्रेड (Coarser Grade) – 10%
इसमें कालीन ग्रेड ऊन का प्रभुत्व इस बात को दर्शाता है कि भारत की ताकत मुख्य रूप से कालीन और गलीचा निर्माण में है, न कि बारीक परिधान ऊन में।
उद्योग की संरचना: संगठित बनाम असंगठित
भारत का ऊन उद्योग दो मुख्य खंडों में विभाजित है:
1. संगठित क्षेत्र:
- कंबोजिंग यूनिट्स
- स्पिनिंग मिल्स
- कॉम्पोजिट मिल्स
- कालीन निर्माण इकाइयाँ
- वस्त्र निर्माण कारखाने
2. असंगठित क्षेत्र:
- हथकरघा और पावरलूम इकाइयाँ
- बुनाई और हौज़री इकाइयाँ
- रंगाई और प्रसंस्करण केंद्र
ये सभी मिलकर एक जटिल मूल्य श्रृंखला बनाते हैं जो ग्रामीण भेड़ पालकों को शहरी एवं निर्यात बाज़ारों से जोड़ती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत वैश्विक ऊन उत्पादन में नौवें स्थान पर है।
- राजस्थान देश के कुल उत्पादन का लगभग आधा योगदान करता है।
- Carpet Grade Wool भारत में उत्पादित ऊन की प्रमुख श्रेणी है।
- ऊन उत्पादन संगठित और असंगठित, दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत है।
रोजगार और पशु आधारित योगदान
- ऊन उद्योग में संगठित क्षेत्र में लगभग 12 लाख और सहायक गतिविधियों में 20 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है।
- केवल कालीन बुनाई में ही लगभग 3 लाख कामगार संलग्न हैं।
भेड़ों के प्रकार के अनुसार ऊन योगदान:
- मादा भेड़ (Ewes) – 71.13%
- नर भेड़ और वेदर (Rams and Wethers) – 14.54%
- भेड़ के बच्चे (Lambs) – 14.33%
यह आँकड़ा फ्लॉक मैनेजमेंट के महत्व को रेखांकित करता है, जो ऊन उत्पादन को स्थायित्व प्रदान करने के लिए आवश्यक है।
भारत में ऊन उद्योग न केवल एक आर्थिक गतिविधि है, बल्कि यह ग्रामीण-शहरी लिंकages, पारंपरिक शिल्प और निर्यात संभावनाओं से जुड़ा हुआ एक व्यापक पारिस्थितिक तंत्र है, जिसे समग्र नीति और निवेश समर्थन की आवश्यकता है।