भारत में आयोजित होगा पहला वैश्विक बिग कैट्स समिट 2026: वन्यजीव संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व की ओर
केंद्रीय बजट 2026 प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि भारत इस वर्ष विश्व का पहला अंतरराष्ट्रीय “बिग कैट्स समिट” आयोजित करेगा। यह घोषणा भारत की वैश्विक वन्यजीव संरक्षण नेतृत्व और पर्यावरणीय कूटनीति को नया आयाम देती है।
ग्लोबल बिग कैट्स समिट: एक ऐतिहासिक पहल
बजट भाषण के दौरान मंत्री ने बताया कि यह समिट International Big Cat Alliance (IBCA) द्वारा आयोजित की जाएगी। इसमें 95 बिग कैट रेंज देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
मुख्य उद्देश्य होंगे:
- समूहगत संरक्षण रणनीति
- आवास संरक्षण
- शिकार, आवास हानि और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों से सामूहिक निपटान
इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA): संरचना और उद्देश्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अप्रैल 2023 को इस अलायंस की घोषणा की थी, जो औपचारिक रूप से 23 जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जिसे अंतरराष्ट्रीय वैधानिक स्थिति प्राप्त है।
IBCA के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- बिग कैट्स वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ाना
- ज्ञान और अनुसंधान साझा करना
- संसाधनों का संग्रह और उपयोग करना
- वैश्विक संरक्षण प्रयासों में सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करना
कौन होते हैं बिग कैट्स?
“बिग कैट्स” शब्द का उपयोग फेलिडे (Felidae) कुल के बड़े आकार के जंगली बिल्ली प्रजातियों के लिए होता है। इनमें मुख्यतः जीनस Panthera की प्रजातियाँ शामिल होती हैं, जो गरजने (roaring) में सक्षम होती हैं:
- बाघ (Tiger)
- सिंह (Lion)
- तेंदुआ (Leopard)
- जैगुआर (Jaguar)
- हिम तेंदुआ (Snow Leopard)
हालाँकि चीता (Cheetah) और प्यूमा (Puma) Panthera वंश में नहीं आते, फिर भी उन्हें उनके आकार और पारिस्थितिक भूमिका के कारण बिग कैट्स की श्रेणी में शामिल किया जाता है।
ये प्रजातियाँ फ्लैगशिप और कीस्टोन स्पीशीज़ मानी जाती हैं, जिनका संरक्षण पूरे पारिस्थितिक तंत्र और कई अन्य प्रजातियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- International Big Cat Alliance (IBCA) जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ।
- भारत 2026 में विश्व का पहला “Big Cats Summit” आयोजित करेगा।
- बिग कैट्स को फ्लैगशिप और कीस्टोन प्रजातियाँ माना जाता है।
- जीनस Panthera की प्रजातियाँ गर्जना (roaring) करने में सक्षम होती हैं।
भारत की संरक्षण परंपरा और वैश्विक दृष्टिकोण
भारत सदियों से बंगाल टाइगर, एशियाटिक लायन, इंडियन लेपर्ड, हिम तेंदुआ और एशियाटिक चीता जैसे प्रजातियों का घर रहा है। हालाँकि एशियाटिक चीता 1952 में भारत से विलुप्त घोषित हुआ, लेकिन हाल के वर्षों में भारत ने चीता पुनर्वास परियोजना भी शुरू की है।
बिग कैट्स समिट की मेज़बानी के ज़रिए भारत:
- हिम तेंदुए जैसे प्रजातियों के लिए सीमापार सहयोग को मज़बूत करेगा
- दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में बाघों की सुरक्षा के लिए संयुक्त प्रयासों को गति देगा
- और वन्यजीव संरक्षण को केवल राष्ट्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करेगा
यह पहल न केवल भारत की वैश्विक वन्यजीव नेतृत्व क्षमता को प्रमाणित करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत विकास और जैव विविधता संरक्षण का मार्ग भी प्रशस्त करती है।