भारत बना विश्व ऊर्जा मांग का नया इंजन: आईईए की रिपोर्ट में बड़ा पूर्वानुमान
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की नवीनतम वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब वैश्विक ऊर्जा मांग का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। बढ़ती आय, तीव्र शहरीकरण और आधुनिक ऊर्जा सेवाओं की ओर झुकाव के चलते भारत आने वाले वर्षों में तेल, गैस, कोयला और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेज़ी से विस्तार करेगा। 2035 तक भारत विश्व ऊर्जा बाजारों में सबसे गतिशील उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो जाएगा।
वैश्विक तेल मांग का प्रमुख चालक बनेगा भारत
आईईए की रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक भारत दुनिया में तेल की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा प्रेरक होगा। देश में तेल उपभोग 2024 के लगभग 5.5 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर 2035 तक करीब 8 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुँच जाएगा। निजी वाहनों की संख्या में वृद्धि, हवाई यात्रा का प्रसार, रसायन और प्लास्टिक उद्योग का विस्तार तथा रसोई में एलपीजी के व्यापक उपयोग से यह मांग तेजी से बढ़ेगी। अनुमान है कि इस अवधि में वैश्विक तेल मांग की अतिरिक्त वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा अकेले भारत से आएगा।
बढ़ती आयात निर्भरता और रिफाइनिंग क्षमता में वृद्धि
हालाँकि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन भारत की तेल आयात पर निर्भरता और बढ़ने की संभावना है। यह 2024 के लगभग 87 प्रतिशत से बढ़कर 2035 तक लगभग 92 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। साथ ही, भारत की रिफाइनिंग क्षमता 6 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर 7.5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुँचने का अनुमान है। इससे भारत न केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों में एक प्रमुख ईंधन निर्यातक और “स्विंग सप्लायर” के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करेगा।
गैस, कोयला और ऊर्जा मांग का पैमाना
प्राकृतिक गैस की मांग 2035 तक लगभग दोगुनी होकर 140 अरब घन मीटर तक पहुँचने की संभावना है, जिसका बड़ा हिस्सा शहरी गैस नेटवर्क और औद्योगिक उपयोग से आएगा। एलएनजी (LNG) आयात 50 अरब घन मीटर तक पहुँचने की उम्मीद है। वहीं, कोयले की मांग में सीमित वृद्धि होगी, जो घरेलू खनन विस्तार और गेवरा खदान जैसी परियोजनाओं के उन्नयन से समर्थित होगी। इससे औद्योगिक और विद्युत जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ कोयले के आयात पर नियंत्रण भी रहेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की तेल मांग 2035 तक लगभग 8 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुँचेगी।
- तेल आयात निर्भरता 92 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।
- रिफाइनिंग क्षमता 7.5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक विस्तारित होगी।
- कुल ऊर्जा मांग 2035 तक 15 एक्साजूल से अधिक बढ़ने की संभावना है।
स्वच्छ ऊर्जा में तेजी और दीर्घकालिक संक्रमण
भारत ने 2030 के लक्ष्य से पहले ही अपनी कुल विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर लिया है। 2035 तक यह हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। सौर और पवन ऊर्जा में निवेश, परमाणु क्षमता में वृद्धि, एथनॉल मिश्रण, बैटरी भंडारण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के आधुनिकीकरण से देश का ऊर्जा तंत्र धीरे-धीरे कम-कार्बन मॉडल की ओर बढ़ रहा है। आईईए का अनुमान है कि भारत का कार्बन उत्सर्जन लगभग 2040 के आसपास चरम पर पहुँचेगा, जबकि 2070 तक “नेट-जीरो” लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में ठोस प्रगति होगी।