भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष: रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा

भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष: रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच प्रस्तावित बैठक के साथ ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। 17 से 19 फरवरी तक फ्रांसीसी राष्ट्रपति की तीन दिवसीय भारत यात्रा दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों को रेखांकित करती है। इस दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बीच यह संवाद दोनों देशों के बढ़ते सामरिक तालमेल को दर्शाता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी सहयोग पर जोर

इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण मुंबई में आयोजित होने वाला एआई इम्पैक्ट समिट में दोनों नेताओं की संयुक्त भागीदारी है। इससे पूर्व दोनों नेताओं ने फ्रांस में आयोजित एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता की थी, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। उस सम्मेलन में मानव-केंद्रित, नैतिक, सुरक्षित और समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था।

‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ का उद्देश्य स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ताओं के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है। उभरती प्रौद्योगिकियों, डिजिटल अवसंरचना और एआई क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा, विशेषकर विकासशील देशों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए।

रक्षा सहयोग को नई मजबूती

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में रक्षा सहयोग केंद्रीय स्तंभ रहा है। हाल ही में भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इनमें से 18 विमान सीधे आयात किए जाएंगे, जबकि शेष का निर्माण भारत में किया जाएगा। भारतीय वायुसेना पहले से 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है, जबकि नौसेना के लिए 26 नौसैनिक संस्करणों का आदेश दिया गया है।

विस्तारित बेड़ा भारत की वायु युद्ध क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगा और रक्षा उद्योग में संयुक्त उत्पादन तथा तकनीकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन देगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बल मिलेगा।

इंडो-पैसिफिक और वैश्विक रणनीतिक समन्वय

दोनों देश बहुपक्षवाद, रणनीतिक स्वायत्तता और संयुक्त राष्ट्र सुधार के प्रति प्रतिबद्धता साझा करते हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग इस साझेदारी का प्रमुख आयाम है। फ्रांस अपने विदेशी क्षेत्रों, जैसे रीयूनियन द्वीप, के माध्यम से इस क्षेत्र में एक स्थायी शक्ति है। इस यात्रा के दौरान भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।

यूरोपीय संघ के भीतर भी फ्रांस ने भारत के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभाई है, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की गहराई बढ़ी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी।
* फ्रांस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने विदेशी क्षेत्रों के कारण एक स्थायी शक्ति है।
* राफेल लड़ाकू विमान का निर्माण डसॉल्ट एविएशन द्वारा किया जाता है।
* एआई एक्शन समिट ने नैतिक और मानव-केंद्रित एआई शासन को बढ़ावा दिया।

रक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भारत और फ्रांस के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ केवल एक औपचारिक पहल नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी का खाका है, जो दोनों देशों को उभरते वैश्विक परिदृश्य में मजबूत और विश्वसनीय सहयोगी के रूप में स्थापित करता है।

Originally written on February 16, 2026 and last modified on February 16, 2026.

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