भारत ने चीनी पेशेवरों के लिए ई-बी-4 ई-बिजनेस वीज़ा शुरू किया
भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने तथा चरणबद्ध रूप से सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत भारत ने एक नई ई-प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट बिजनेस वीज़ा श्रेणी की शुरुआत की है। इसे ई-बी-4 वीज़ा कहा गया है, जिसके माध्यम से चीनी व्यापारिक और औद्योगिक पेशेवर निर्धारित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भारत की यात्रा कर सकेंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच हाल के जन-केंद्रित उपायों का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को व्यावहारिक आधार पर आगे बढ़ाना है।
ई-बी-4 वीज़ा क्या है
भारतीय दूतावास, बीजिंग द्वारा जारी परामर्श के अनुसार ई-बी-4 वीज़ा को 1 जनवरी से लागू किया गया है। यह पूरी तरह ऑनलाइन आवेदन आधारित वीज़ा है, जिसके लिए न तो दूतावास जाने की आवश्यकता है और न ही किसी बिचौलिए की। इस वीज़ा के जारी होने में लगभग 45 से 50 दिन का समय लग सकता है और इसके तहत भारत में अधिकतम छह महीने तक रहने की अनुमति होगी। ई-बी-4 वीज़ा विशेष रूप से उत्पादन से जुड़े और निवेश-आधारित व्यापारिक कार्यों को सुगम बनाने के लिए तैयार किया गया है।
अनुमत व्यावसायिक गतिविधियां
ई-बी-4 वीज़ा के अंतर्गत कई प्रकार की औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को अनुमति दी गई है। इनमें उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग, गुणवत्ता जांच, आवश्यक रखरखाव, उत्पादन गतिविधियां, आईटी और ईआरपी सिस्टम का विस्तार, कार्यबल प्रशिक्षण, सप्लाई चेन विकास और विक्रेता पैनलिंग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संयंत्रों की डिजाइनिंग, कमीशनिंग और वरिष्ठ प्रबंधन व कार्यकारी अधिकारियों की व्यावसायिक यात्राएं भी इस वीज़ा के दायरे में आती हैं। इसका उद्देश्य विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में परिचालन निरंतरता बनाए रखना है।
आवेदन प्रक्रिया और संस्थागत व्यवस्था
चीनी नागरिक सीधे ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, भारत के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ई-वीज़ा विकल्प चुनकर आवेदन कर सकते हैं और आवश्यक दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। वहीं, भारतीय कंपनियों को चीनी पेशेवरों को आमंत्रित करने के लिए उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग की नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम पर पंजीकरण करना होगा। आवेदन प्रक्रिया एनएसडब्ल्यूएस पोर्टल के ‘बिजनेस यूज़र लॉगिन’ के माध्यम से पूरी की जा सकती है।
भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में महत्व
ई-बी-4 वीज़ा की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बाद लोगों और व्यवसायों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। यह पहल सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए आर्थिक व्यावहारिकता का संतुलन साधने का प्रयास है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां विशेष तकनीकी विशेषज्ञता और वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता अधिक है। इससे औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश से जुड़ी गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ई-बी-4 एक इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट बिजनेस वीज़ा है।
- इसके तहत चीनी पेशेवर भारत में अधिकतम छह महीने तक रह सकते हैं।
- वीज़ा विनिर्माण, आईटी और सप्लाई चेन से जुड़ी गतिविधियों को समर्थन देता है।
- आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है।
कुल मिलाकर, ई-बी-4 वीज़ा भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देते हुए नियंत्रित और सुव्यवस्थित तरीके से अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक आवागमन को सुगम बनाया जा रहा है, ताकि उद्योग और निवेश से जुड़े हित सुरक्षित रहते हुए आगे बढ़ सकें।