भारत–दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को मिला नया बल
भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। यह आश्वासन सियोल में आयोजित छठे विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद (एफपीएसडी) के दौरान दिया गया, जिससे 2026 से पहले द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा का संकेत मिला है। दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार पर सहमति जताई।
सियोल में उच्चस्तरीय वार्ता
संवाद की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) पी. कुमारन और दक्षिण कोरिया के प्रथम उप विदेश मंत्री पार्क यून-जू ने की। बैठक में रक्षा, सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी प्रमुख आयामों पर चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने 2026 में उच्चस्तरीय यात्राओं और संयुक्त आयोग बैठकों की श्रृंखला आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की। इससे विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत नीतिगत समन्वय और कूटनीतिक तालमेल को और सुदृढ़ करने की अपेक्षा है।
आर्थिक और तकनीकी सहयोग
वार्ता में आर्थिक सहयोग प्रमुख विषय रहा। भारत ने जहाज निर्माण और समुद्री अवसंरचना में कोरियाई कंपनियों के लिए बढ़ते अवसरों पर प्रकाश डाला। दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर बल दिया।
महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास पर संयुक्त पहल की संभावनाएं भी तलाश की गईं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और हरित हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों को सहयोग के प्राथमिक क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया। इन क्षेत्रों में साझेदारी नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को गति दे सकती है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और बहुपक्षीय समन्वय
संवाद के दौरान कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बदलते परिदृश्य पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया।
इसके अतिरिक्त, बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने और वैश्विक शासन सुधार तथा सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* भारत–दक्षिण कोरिया संबंधों को वर्ष 2015 में विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था।
* हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों देशों की विदेश नीति रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
* महत्वपूर्ण खनिज सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा प्रौद्योगिकी के लिए आवश्यक होते हैं।
* हरित हाइड्रोजन को शून्य-कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रमुख ईंधन माना जाता है।
एफपीएसडी के दौरान पी. कुमारन ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्युन और राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। यह दौरा भारत–दक्षिण कोरिया संबंधों की निरंतर प्रगति और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के प्रयासों का हिस्सा है।