भारत-डब्ल्यूएफपी समझौता: वैश्विक भूख राहत के लिए पांच वर्षीय चावल आपूर्ति
भारत ने वैश्विक खाद्य असुरक्षा से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ पांच वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत भारत संकटग्रस्त और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता के लिए नियमित रूप से चावल की आपूर्ति करेगा। अफ्रीका, पश्चिम एशिया और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ती मानवीय चुनौतियों के बीच यह पहल भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
समझौते का दायरा और उद्देश्य
यह समझौता भारतीय खाद्य निगम और विश्व खाद्य कार्यक्रम के बीच संपन्न हुआ है। इसके तहत भारत अगले पांच वर्षों में अधिकतम दो लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराएगा, जिसका उपयोग आपातकालीन खाद्य सहायता अभियानों में किया जाएगा। मानवीय वितरण मानकों के अनुरूप आपूर्ति किए जाने वाले चावल में 25 प्रतिशत तक टूटे हुए दाने शामिल हो सकते हैं।
इस समझौते को आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में कमजोर आबादी को समय पर और नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध हो सके। इससे राहत अभियानों की योजना और क्रियान्वयन में स्थिरता आएगी।
मूल्य निर्धारण और आपूर्ति तंत्र
चावल की कीमत हर वर्ष भारतीय खाद्य निगम और विश्व खाद्य कार्यक्रम के बीच आपसी परामर्श से तय की जाएगी। वर्तमान आपूर्ति चक्र के लिए 31 मार्च 2026 तक कीमत 2,800 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। यह संरचित मूल्य प्रणाली मानवीय मिशनों के लिए खरीद और लॉजिस्टिक योजना में पारदर्शिता तथा पूर्वानुमान सुनिश्चित करती है।
समझौते को दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा औपचारिक रूप दिया गया, जिससे संस्थागत प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। इसके माध्यम से खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण की प्रक्रिया में संचालनात्मक स्पष्टता मिलेगी।
वैश्विक खाद्य व्यवस्था में भारत की भूमिका
भारत विश्व के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय अनाज बाजार को स्थिर बनाए रखने में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। यह समझौता भारत को एक जिम्मेदार और विश्वसनीय विकास साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय एजेंसियों के समक्ष वित्तीय चुनौतियों के कारण वैश्विक खाद्य असुरक्षा बढ़ी है। ऐसे समय में भारत की निरंतर सहायता विश्व खाद्य कार्यक्रम को संकटग्रस्त समुदायों तक पौष्टिक भोजन पहुँचाने में मदद करेगी। यह पहल वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ भारत के सहयोगात्मक दृष्टिकोण को भी सुदृढ़ करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* विश्व खाद्य कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता शाखा है और वर्ष 2020 का नोबेल शांति पुरस्कार विजेता है।
* भारतीय खाद्य निगम उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
* भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देशों में शामिल है और वैश्विक अनाज आपूर्ति शृंखला में प्रमुख भूमिका निभाता है।
* सतत विकास लक्ष्य 2 (एसडीजी-2) का उद्देश्य “शून्य भूख” सुनिश्चित करना है।
यह समझौता भारत की उस रणनीतिक सोच को रेखांकित करता है, जिसमें कृषि क्षमता को मानवीय सहायता और कूटनीतिक पहल के साथ जोड़ा गया है। घरेलू खाद्य सुरक्षा को संतुलित रखते हुए वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना भारत की दोहरी भूमिका—आपूर्तिकर्ता और संरक्षक—को स्पष्ट करता है। आने वाले वर्षों में यह पहल वैश्विक खाद्य स्थिरता और पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की साख को और मजबूत करेगी।