भारत–चीन व्यापार संबंधों में नया मोड़, 2025 में रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचा द्विपक्षीय व्यापार
भारत और चीन के आर्थिक संबंधों ने एक नए युग में प्रवेश किया है, जहाँ 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार ने ऐतिहासिक ऊँचाई को छू लिया। वर्षों की कूटनीतिक तनातनी के बाद यह व्यापारिक वृद्धि दोनों देशों के बीच बढ़ते परस्पर सहयोग और आर्थिक परस्परनिर्भरता को दर्शाती है। चीनी अधिकारियों ने इस प्रगति को “सुधार के नए स्तर” की संज्ञा दी है, जो द्विपक्षीय संबंधों में सतर्क आशावाद को दर्शाता है।
रिकॉर्ड स्तर पर भारत–चीन द्विपक्षीय व्यापार
2025 में भारत–चीन के बीच कुल व्यापार 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% से अधिक की वृद्धि है। यह अब तक का सर्वाधिक व्यापारिक आँकड़ा है। भारत से चीन को निर्यात में भी लगभग 9.7% की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस ओर इशारा करता है कि भारतीय उत्पादों की चीन में मांग लगातार बढ़ रही है, हालांकि व्यापार असंतुलन अभी भी बना हुआ है। इन आँकड़ों से दोनों देशों की आर्थिक परस्पर निर्भरता का नया स्तर सामने आता है।
कूटनीतिक संकेत और उच्च स्तरीय वार्ताएं
भारत–चीन संबंधों में सुधार का एक अहम पड़ाव अगस्त 2025 में आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तियानजिन में शिखर बैठक हुई। चीनी अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक “रीसेट और नई शुरुआत” से आगे बढ़कर स्थायी संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और संस्थागत स्तरों पर संवाद और समन्वय में वृद्धि देखी गई है।
बहुपक्षीय सहयोग और ग्लोबल साउथ पर फोकस
चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन करते हुए बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। दोनों देशों ने विकास रणनीतियों के समन्वय और परस्पर आर्थिक लाभ बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। भारत–चीन सहयोग को अब उभरती अर्थव्यवस्थाओं की नेतृत्व भूमिका के संदर्भ में, विशेषकर ग्लोबल साउथ के हितों के समर्थन में देखा जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत–चीन द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है।
- भारत से चीन को निर्यात में लगभग 9.7% की सालाना वृद्धि हुई।
- अगस्त 2025 में तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक ने संबंधों को नई दिशा दी।
- चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया।
आर्थिक अवसर और रणनीतिक सतर्कता
चीन ने दोनों देशों के विकास मॉडल में समन्वय को और गहरा करने पर बल दिया है ताकि आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाया जा सके। व्यापार में इस उछाल से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत व्यावसायिक सामर्थ्य का संकेत मिलता है, लेकिन साथ ही रणनीतिक संतुलन और सतर्कता को भी बनाए रखा गया है। भविष्य में भारत–चीन संबंधों की दिशा स्थिरता, पूर्वानुमेयता और धीरे-धीरे बढ़ते विश्वास निर्माण पर निर्भर करेगी, क्योंकि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर प्रतिस्पर्धा और सहयोग के बीच संतुलन बना रहे हैं।