भारत के प्रिय पत्रकार मार्क टली का निधन: पत्रकारिता के एक युग का अंत

भारत के प्रिय पत्रकार मार्क टली का निधन: पत्रकारिता के एक युग का अंत

भारत-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता के सबसे विश्वसनीय नामों में से एक, मार्क टली का 90 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में निधन हो गया। मैक्स अस्पताल, साकेत में इलाज के दौरान उन्हें स्ट्रोक के बाद मल्टी-ऑर्गन फेलियर हुआ, जिसके कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके करीबी मित्र और वरिष्ठ पत्रकार सतीश जैकब ने की। यह घटना पत्रकारिता जगत में एक युग की समाप्ति के समान मानी जा रही है।

भारत में रचा-बसा जीवन

24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता में जन्मे मार्क टली का बचपन भारत में ही बीता। शिक्षा के लिए वे ब्रिटेन गए, लेकिन उनका दिल भारत में ही रमा रहा। 1964 में वे बीबीसी के संवाददाता के रूप में भारत लौटे और यहीं से उनके पत्रकारिता जीवन की असली शुरुआत हुई। भारत केवल उनका रिपोर्टिंग क्षेत्र नहीं, बल्कि उनका घर बन गया। यही कारण था कि उनके लेखन और रिपोर्टिंग में भारत की आत्मा झलकती थी।

बीबीसी के वर्षों और ऐतिहासिक रिपोर्टिंग

मार्क टली 22 वर्षों तक बीबीसी के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रहे। इस दौरान उन्होंने भारतीय इतिहास की कई निर्णायक घटनाओं को कवर किया, जिनमें शामिल हैं:

  • 1971 का बांग्लादेश युद्ध
  • 1975-77 का आपातकाल
  • ऑपरेशन ब्लू स्टार
  • इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्याएँ
  • 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस

उनकी रिपोर्टिंग की खास बात यह थी कि वे जटिल विषयों को सरलता से नहीं, बल्कि गहराई और सहानुभूति के साथ प्रस्तुत करते थे। वे भारतीय समाज को समझने और दिखाने में अद्वितीय थे।

लेखक, प्रसारक और भारत-ब्रिटेन के बीच सेतु

पत्रकारिता से आगे बढ़ते हुए मार्क टली ने 10 से अधिक चर्चित पुस्तकें लिखीं, जिनमें से No Full Stops in India, India in Slow Motion, और The Heart of India विशेष रूप से लोकप्रिय रहीं। इसके साथ ही उन्होंने बीबीसी रेडियो 4 के कार्यक्रम Something Understood का संचालन भी किया। उन्होंने भारत, ब्रिटिश राज और भारतीय रेल पर कई वृत्तचित्रों में भी काम किया, जिससे भारत और ब्रिटेन के बीच सांस्कृतिक समझ को बल मिला।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मार्क टली 22 वर्षों तक बीबीसी के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रहे।
  • उन्हें 2002 में ब्रिटिश क्राउन द्वारा नाइटहुड और 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • उन्होंने आपातकाल, बाबरी विध्वंस और इंदिरा गांधी की हत्या जैसी प्रमुख घटनाओं की रिपोर्टिंग की।
  • उनकी किताबें भारतीय सामाजिक-राजनीतिक तानेबाने पर गहरी पकड़ दर्शाती हैं।

निष्कलंकता और विश्वसनीयता की विरासत

बीबीसी से 1994 में अलग होने के बाद भी वे एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय रहे। उन्हें ईमानदारी, निष्पक्षता और गहराईपूर्ण रिपोर्टिंग के लिए याद किया जाता है। उनके शब्दों और विश्लेषणों में जो संतुलन और विश्वसनीयता थी, उसने उन्हें कई पीढ़ियों के पाठकों और दर्शकों का प्रिय बना दिया।

मार्क टली का जाना न केवल एक अनुभवी पत्रकार का अंत है, बल्कि भारत से जुड़े एक आत्मीय दृष्टिकोण का भी अवसान है। उनकी पत्रकारिता, लेखन और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भारत की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेगा।

Originally written on January 26, 2026 and last modified on January 26, 2026.

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