भारत के नए जलवायु लक्ष्य: 2035 तक हरित विकास की दिशा

भारत के नए जलवायु लक्ष्य: 2035 तक हरित विकास की दिशा

भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को अपडेट करते हुए 2035 तक के लिए नए और अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इन लक्ष्यों में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 60% बिजली क्षमता हासिल करना, जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 2005 के स्तर से 47% की कमी लाना, और 3.5–4 अरब टन CO₂ समकक्ष कार्बन सिंक का विस्तार शामिल है। ये प्रतिबद्धताएं पेरिस समझौते के तहत संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को प्रस्तुत की जाएंगी।

2035 के लिए उन्नत जलवायु लक्ष्य

भारत के संशोधित लक्ष्य जलवायु कार्रवाई में बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं, साथ ही विकास की जरूरतों को भी संतुलित करते हैं। 60% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य पहले के मुकाबले काफी अधिक है। इसके अलावा, 47% उत्सर्जन तीव्रता में कमी ऊर्जा दक्षता में सुधार का संकेत देती है। कार्बन सिंक बढ़ाने का लक्ष्य वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वर्तमान लक्ष्यों से तुलना

भारत ने 2022 में अपने 2030 के लक्ष्यों में 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता, 44% उत्सर्जन तीव्रता में कमी और 2.5–3 अरब टन कार्बन सिंक का लक्ष्य रखा था। उल्लेखनीय है कि भारत पहले ही लगभग 52% स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल कर चुका है, हालांकि वास्तविक उत्पादन अभी लगभग 25% के आसपास है। 2005 से 2020 के बीच भारत ने उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 36% की कमी भी हासिल की है।

वैश्विक जलवायु ढांचा और सिद्धांत

भारत की ये नई प्रतिबद्धताएं “सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमताएं” (CBDR-RC) सिद्धांत पर आधारित हैं, जो विकसित और विकासशील देशों के बीच समानता सुनिश्चित करता है। साथ ही, यह वैश्विक स्टॉकटेक के निष्कर्षों को भी ध्यान में रखता है, जो 1.5°C तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए वैश्विक प्रगति का आकलन करता है और अधिक सशक्त प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) पेरिस समझौते के तहत देशों की जलवायु कार्ययोजना होती है।
  • CBDR-RC सिद्धांत विकसित और विकासशील देशों के बीच जिम्मेदारियों के संतुलन पर आधारित है।
  • ग्लोबल स्टॉकटेक वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने की प्रगति का आकलन करता है।
  • गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों में सौर, पवन, जल, बायोमास और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।

चुनौतियां और वैश्विक संदर्भ

हालांकि भारत ने जलवायु लक्ष्यों की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। देश का वन क्षेत्र अभी लगभग 24.6% है, जबकि लक्ष्य 33% का है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रयास अभी भी अपर्याप्त हैं। ऐसे में भारत की नई NDC प्रतिबद्धताएं उसे विकासशील देशों के बीच एक प्रमुख जलवायु नेता के रूप में स्थापित करती हैं।

Originally written on March 27, 2026 and last modified on March 27, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *