भारत के इस्पात उद्योग के स्तंभ जतिंदर मेहरा का निधन, औद्योगिक विकास का एक युग समाप्त
जतिंदर मेहरा, जिन्होंने भारत के इस्पात उद्योग में छह दशकों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण योगदान दिया, का मंगलवार को निधन हो गया। धातु क्षेत्र में उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए वे व्यापक रूप से सम्मानित थे। उनके निधन के साथ भारत के औद्योगिक विकास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हो गया।
एस्सार समूह में रणनीतिक नेतृत्व
एस्सार समूह में धातु एवं खनन प्रभाग के उपाध्यक्ष के रूप में मेहरा ने समूह की इस्पात और खनन गतिविधियों को रणनीतिक दिशा प्रदान की। उन्होंने गुजरात के हजीरा में इस्पात उत्पादन क्षमता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे समूह की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत हुई।
ओडिशा के पारादीप में एकीकृत इस्पात परियोजना के विकास में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उनके नेतृत्व में एस्सार ने मूल्यवर्धित इस्पात उत्पादन और निर्यात क्षमता के क्षेत्र में वैश्विक पहचान स्थापित की।
सार्वजनिक क्षेत्र में विशिष्ट योगदान
निजी क्षेत्र में आने से पूर्व मेहरा ने सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योग में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक के रूप में उन्होंने परिचालन सुधार और क्षमता विस्तार की पहल को आगे बढ़ाया।
बाद में वे राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक बने, जहां उन्होंने विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र के संचालन और स्थिरीकरण की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में उत्पादन क्षमता और संगठनात्मक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
सम्मान और उद्योग पर प्रभाव
वर्ष 2022 में भारतीय इस्पात संघ ने उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। वे केवल एक प्रशासक ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और उद्योग विचारक के रूप में भी जाने जाते थे। उन्होंने धातुकर्म और इस्पात निर्माण के क्षेत्र में अनेक पेशेवरों को प्रशिक्षित और प्रेरित किया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड एक महारत्न सार्वजनिक उपक्रम है।
- राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र संचालित करता है।
- गुजरात का हजीरा एक प्रमुख एकीकृत इस्पात उत्पादन केंद्र है।
- भारतीय इस्पात संघ देश के प्रमुख इस्पात उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करता है।
जतिंदर मेहरा का करियर सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में भारतीय इस्पात उद्योग के परिवर्तन का साक्षी रहा। क्षमता निर्माण, परियोजना क्रियान्वयन और संस्थागत नेतृत्व में उनके योगदान ने भारत को विश्व के प्रमुख इस्पात उत्पादकों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी विरासत उन संस्थानों और पेशेवरों के माध्यम से जीवित रहेगी, जिन्हें उन्होंने सशक्त बनाया।