भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 26 जनवरी 2026 से शुरू करेगी ट्रायल: हरियाणा के जिन्द–सोनीपत रूट पर हरित गतिशीलता की ओर बड़ा कदम
भारत की हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए, भारतीय रेलवे 26 जनवरी 2026 से हरियाणा के जिन्द–सोनीपत खंड पर देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन का ट्रायल शुरू करेगा। यह परियोजना न केवल डीजल पर निर्भरता को कम करने बल्कि रेलवे की कार्बन उत्सर्जन में कटौती की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारतीय रेलवे की हरित पहल
90 किलोमीटर लंबे इस रूट को पायलट कॉरिडोर के रूप में चुना गया है, और उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा झंडी दिखाए जाने की संभावना है। ट्रेन की अधिकतम गति 110 से 140 किमी/घंटा होगी और यह लगभग 1 घंटे में यात्रा पूरी करेगी, जो डीजल सेवाओं से आधे समय में तेज़ है।
तकनीक, डिजाइन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
इस परियोजना को भारतीय रेलवे, रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) और स्पेन की Green H कंपनी के सहयोग से क्रियान्वित किया गया है। ट्रेन में इलेक्ट्रोकेमिकल फ्यूल-सेल तकनीक का प्रयोग होता है, जो पानी से हाइड्रोजन उत्पन्न कर ऊर्जा बनाती है। लगभग 9 किलो पानी से प्राप्त 900 ग्राम हाइड्रोजन एक किलोमीटर की यात्रा के लिए पर्याप्त होती है। प्रणाली 3,000 किग्रा हाइड्रोजन और 7,680 किग्रा ऑक्सीजन स्टोर कर सकती है।
आधारभूत ढांचा और यात्री सुविधाएँ
जिन्द में स्पेनी तकनीकी सहयोग से एक समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र और 1.5 मेगावाट बिजली आपूर्ति व्यवस्था स्थापित की गई है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी में निर्मित कोचों में 1,200 हॉर्सपावर वाले दो पॉवर कार हैं। ईंधन सेल्स से उत्पन्न 3,750 एम्पियर DC करंट से एसी, लाइट, फैन और डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली संचालित होती है। साथ ही स्वचालित दरवाजे और आधुनिक सुरक्षा सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल जिन्द–सोनीपत (हरियाणा) रूट पर होगा।
- हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेनों से केवल भाप और जलवाष्प उत्सर्जित होता है।
- RDSO, भारतीय रेलवे की तकनीकी सलाहकार संस्था है।
- हाइड्रोजन ट्रेनें गैर-विद्युतीकृत मार्गों पर डीजल का वैकल्पिक समाधान बन सकती हैं।
किराया, क्षमता और पर्यावरणीय प्रभाव
यह सेवा मार्ग के छह स्टेशनों को कवर करेगी और इसका किराया ₹5 से ₹25 के बीच होने की संभावना है। ट्रेन की क्षमता लगभग 2,500 यात्रियों की है और इसे ₹89 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रेन 1 किग्रा हाइड्रोजन में 4.5 लीटर डीजल के बराबर दक्षता प्रदान करती है। इसके अलावा, रखरखाव कम लागत वाला है और यह ट्रेन ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन के बिना लंबे सफर तय करने में सक्षम है।
यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य की ओर ले जाती है और रेलवे परिवहन को पर्यावरण के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाती है।