भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना 2026 से शुरू

भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना 2026 से शुरू

भारत 1 अप्रैल 2026 से अपनी पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना की शुरुआत करने जा रहा है, जो देश की जनगणना प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है। यह देश की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। इस विशाल प्रक्रिया में लगभग 30 लाख अधिकारी, जिनमें गणनाकर्मी और पर्यवेक्षक शामिल हैं, भाग लेंगे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना गतिविधि माना जा रहा है।

डिजिटल तकनीक और स्वयं-गणना की शुरुआत

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए डेटा संग्रह किया जाएगा। एक महत्वपूर्ण नवाचार “स्वयं-गणना” है, जिसके तहत नागरिक एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। यह पोर्टल 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा। जानकारी जमा करने के बाद परिवार को एक विशेष आईडी दी जाएगी, जिसे बाद में गणनाकर्मी सत्यापित करेंगे। यह प्रणाली पारंपरिक और डिजिटल दोनों तरीकों का मिश्रण है, जिससे डेटा की सटीकता और भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

कानूनी आधार और संदर्भ तिथि

जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत किया जाएगा। देश के अधिकांश हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है। वहीं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है, ताकि मौसम संबंधी कठिनाइयों से बचा जा सके।

दो चरणों में होगा पूरा सर्वेक्षण

यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें घरों की सूची, आवास की स्थिति, सुविधाएं और संपत्तियों का विवरण दर्ज किया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें जनसंख्या से संबंधित सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में जाति से जुड़ा डेटा भी एकत्र किया जाएगा, जो नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

विशाल पैमाने पर तैयारी और क्रियान्वयन

सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए ₹11,718.24 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। यह अभियान 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 7,000 से अधिक उप-जिलों और लगभग 6.4 लाख गांवों को कवर करेगा। इसके लिए उन्नत डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें मोबाइल एप, वेब-आधारित मैपिंग टूल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं। अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय, मास्टर और फील्ड ट्रेनरों की व्यवस्था की गई है। नवंबर 2025 में किए गए पूर्व परीक्षण ने इस डिजिटल प्रणाली की प्रभावशीलता को साबित किया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी, जबकि नियमित दशकीय जनगणना 1881 से शुरू हुई।
  • जनगणना अधिनियम, 1948 भारत में जनगणना की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
  • जनगणना 2027 में पहली बार स्वयं-गणना की सुविधा शुरू की जा रही है।
  • भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करते हैं।

अंततः, डिजिटल जनगणना 2026 भारत की प्रशासनिक प्रणाली में तकनीकी बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इससे न केवल डेटा संग्रह अधिक तेज और सटीक होगा, बल्कि नीति निर्माण और विकास योजनाओं को भी अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

Originally written on April 1, 2026 and last modified on April 1, 2026.

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