भारत की पहली टेलिंग्स नीति: खनिज अपशिष्ट से महत्त्वपूर्ण खनिजों की खोज की दिशा में क्रांतिकारी कदम
केंद्र सरकार ने भारत की पहली व्यापक टेलिंग्स नीति की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य खदानों से उत्पन्न अपशिष्ट (माइन वेस्ट) से महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की पुनर्प्राप्ति को सक्षम बनाना है। यह नीति केवल प्राथमिक खनिज स्रोतों पर ही नहीं, बल्कि माइन डंप्स, टेलिंग्स पॉन्ड्स, स्लैग्स और अन्य औद्योगिक अवशेषों जैसे द्वितीयक स्रोतों पर भी अन्वेषण को प्रोत्साहित करती है। यह भारत की खनिज रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
टेलिंग्स क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण हैं?
टेलिंग्स वह अपशिष्ट सामग्री होती है जो खनिज अयस्कों से मूल्यवान खनिज निकालने के बाद बचती है। केंद्रीय बजट में इस नीति की रूपरेखा की घोषणा की गई थी, जिसका उद्देश्य इन अपशिष्टों से महत्त्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति की व्यवस्था करना था।
सरकार ने यह भी माना है कि कई महत्त्वपूर्ण खनिज केवल पारंपरिक खनिज खंडों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य मंत्रालयों के अधीन रहने वाले औद्योगिक अवशेषों में भी पाए जा सकते हैं, जिससे अंतर-मंत्रालयी समन्वय की आवश्यकता उत्पन्न होती है।
मौजूदा खदानों में सहायक खनिजों की संभावनाएँ
नीति इस धारणा पर आधारित है कि भारत में वर्तमान में जिन अयस्कों का प्राथमिक रूप में खनन हो रहा है, उनमें कई सहायक खनिज (Companion Minerals) टेलिंग्स में मौजूद होते हैं।
उदाहरणस्वरूप:
- कॉपर टेलिंग्स में सेलेनियम, टेल्यूरियम, मोलिब्डेनम, कोबाल्ट, रेनियम, सोना और चांदी पाए जा सकते हैं।
- जिंक अयस्कों में जर्मेनियम, कैडमियम, इंडियम और चांदी की उपस्थिति देखी गई है।
इन तत्वों की पुनर्प्राप्ति से संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी और खनिज अपव्यय में कमी आएगी।
खोज एजेंसियों की भूमिका
खनिज मंत्रालय ने भारतीय खान ब्यूरो (IBM), सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टिट्यूट (CMPDI) और एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट (AMD) जैसी एजेंसियों को निर्देशित किया है कि वे मौजूदा खानों में टेलिंग्स और डंप्स का व्यवस्थित नमूनाकरण और विश्लेषण करें।
इस प्रक्रिया से निम्नलिखित लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा:
- “Companionality” का निर्धारण
- अपशिष्ट सामग्री का स्थान और मात्रा पहचानना
- पुनर्प्राप्ति की आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन करना
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टेलिंग्स खनिज निष्कर्षण के बाद बची हुई अपशिष्ट सामग्री होती है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) में लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ पृथ्वी तत्व शामिल हैं।
- IBM, CMPDI और AMD टेलिंग्स नीति के अंतर्गत प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसियाँ हैं।
- सहायक खनिज वे मूल्यवान तत्व होते हैं जो प्रमुख अयस्कों के साथ पाए जाते हैं।
आत्मनिर्भरता और हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा
लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों जैसे महत्त्वपूर्ण खनिज बैटरियों, सौर पैनलों, पवन टर्बाइनों और अन्य हरित प्रौद्योगिकियों के लिए अनिवार्य हैं।
यह नीति न केवल प्राथमिक, बल्कि द्वितीयक स्रोतों से भी इन खनिजों को प्राप्त करने के लिए मानकीकृत दिशानिर्देश प्रदान करेगी, जिससे भारत की आयात निर्भरता घटेगी, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला सशक्त होगी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ेंगे।
कोयला, गैर-कोयला, परमाणु खनिज और पेट्रोलियम क्षेत्रों को मिलाकर अन्वेषण को एकीकृत करते हुए, यह टेलिंग्स नीति भारत के हरित और सतत विकास लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।