भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम: डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना का प्रभाव
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीति पहल की है। डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के माध्यम से भारत फैब्लेस चिप डिज़ाइन (Fabless Chip Design) में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है। सेमीकंडक्टर चिप्स अब स्वास्थ्य, परिवहन, संचार, रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों के लिए अनिवार्य हो चुके हैं, जिससे उनकी घरेलू डिज़ाइन और उत्पादन क्षमताओं का निर्माण राष्ट्र के लिए रणनीतिक रूप से आवश्यक हो गया है।
फैब्लेस चिप डिज़ाइन का महत्व
सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में चिप डिज़ाइन और बौद्धिक संपदा (IP) का हिस्सा 50% से अधिक होता है। यदि भारत में फैब्लेस डिज़ाइन क्षमताएं विकसित नहीं होतीं, तो इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण विदेशी तकनीक और आयातित घटकों पर निर्भर रहेगा।
फैब्लेस डिज़ाइन से लाभ:
- मूल तकनीक पर अधिकार
- आयात पर निर्भरता में कमी
- देश में उत्पादन को आकर्षित करना
- तकनीकी नेतृत्व सुनिश्चित करना
डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना की रूपरेखा
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा Semicon India Programme के अंतर्गत संचालित DLI योजना, भारत में फैब्लेस डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करती है। योजना के तहत सहायता प्राप्त होती है:
- योग्य डिज़ाइन व्यय का 50% तक प्रतिपूर्ति, अधिकतम ₹15 करोड़
- नेट बिक्री पर 6% से 4% तक प्रोत्साहन, 5 वर्षों के लिए, नियत शर्तों के अधीन
यह योजना स्टार्टअप्स, MSMEs और घरेलू कंपनियों को चिप्स, SoCs, सिस्टम्स और IP कोर डिज़ाइन में मदद करती है।
डिज़ाइन अवसंरचना और पारिस्थितिकी तंत्र
DLI योजना की एक बड़ी विशेषता है ChipIN केंद्र, जिसे C-DAC द्वारा स्थापित किया गया है। यह केंद्र प्रदान करता है:
- Electronic Design Automation (EDA) उपकरणों तक पहुँच
- IP कोर रिपॉजिटरी
- MPW प्रोटोटाइपिंग और पोस्ट-सिलिकॉन परीक्षण
दिसंबर 2021 से अब तक:
- 400 से अधिक संगठनों के एक लाख से अधिक इंजीनियर और छात्र इन सुविधाओं का उपयोग कर चुके हैं
- EDA उपयोग में 54 लाख घंटे से अधिक का रिकॉर्ड
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- DLI योजना Semicon India Programme के अंतर्गत आती है।
- सेमीकंडक्टर डिज़ाइन से कुल मूल्य का 50% से अधिक योगदान होता है।
- ChipIN केंद्र साझा डिज़ाइन अवसंरचना प्रदान करता है।
- Semicon India Programme का कुल परिव्यय ₹76,000 करोड़ है।
डिज़ाइन से सिलिकॉन तक: सफलता की कहानियाँ
DLI योजना के अंतर्गत अब तक 24 चिप डिज़ाइन परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं, जो इन क्षेत्रों को कवर करती हैं:
- निगरानी प्रणाली
- ड्रोन
- माइक्रोप्रोसेसर
- सैटेलाइट संचार
- IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स)
उपलब्धियाँ:
- 16 टेप-आउट, 6 चिप्स का निर्माण, 10 पेटेंट, 140+ IP कोर
- 1000 से अधिक विशेष इंजीनियरों का प्रशिक्षण
भारतीय स्टार्टअप्स जैसे Vervesemi, InCore, Netrasemi, Aheesa और AAGYAVISION ने चिप डिज़ाइन को सिद्ध उत्पादों तक पहुँचाने में सफलता पाई है। ये उपलब्धियाँ भारत की डिज़ाइन आधारित सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो रही हैं।
इस नीति पहल से भारत अब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय और नवाचार-प्रेरित खिलाड़ी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।