भारत का पहला स्लम-फ्री शहर बनने की राह पर सूरत: समावेशी शहरी विकास का आदर्श मॉडल

भारत का पहला स्लम-फ्री शहर बनने की राह पर सूरत: समावेशी शहरी विकास का आदर्श मॉडल

हीरे की राजधानी कहे जाने वाले गुजरात के सूरत शहर ने शहरी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर कदम बढ़ा दिया है। वर्षों की सुनियोजित योजना और आवास योजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के बल पर सूरत अब भारत का पहला पूर्णतः स्लम-फ्री शहर बनने के करीब है। यह पहल केवल बुनियादी ढांचे का नहीं, बल्कि गरिमा और स्थायित्व के साथ जीवन जीने के अधिकार का प्रतीक बन गई है।

सूरत नगर निगम का उद्देश्य स्पष्ट है—हर परिवार को स्थायी और सुसज्जित आवास उपलब्ध कराना, ताकि झुग्गियों की आवश्यकता ही समाप्त हो जाए। इस दिशा में सूरत के शहरी मॉडल को अब अन्य शहरों के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

सूरत का स्लम-फ्री विजन और शहरी रणनीति

सूरत में झुग्गियों की जगह अब योजनाबद्ध, बहुमंजिला आवासीय इमारतों ने ले ली है। इन-सिटू पुनर्विकास (in-situ redevelopment) की रणनीति के तहत, निवासियों को उन्हीं स्थानों पर बेहतर आवास उपलब्ध कराया गया है, जहाँ पहले असंगठित बस्तियाँ थीं। इससे न केवल लोगों को उनके रोजगार स्थलों के पास रहने का अवसर मिला, बल्कि उनके सामाजिक नेटवर्क भी संरक्षित रहे। इस रणनीति ने पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक सहज और स्वीकार्य बनाया है।

आवास योजनाओं और बुनियादी ढांचे की भूमिका

सूरत में इस परिवर्तन का प्रमुख आधार प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और राज्य स्तरीय आवास नीतियाँ रही हैं। हजारों किफायती आवास इकाइयाँ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के लिए निर्मित की गई हैं। इन कॉलोनियों में पाइपयुक्त जलापूर्ति, पक्की सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं, जिससे एक सम्मानजनक शहरी जीवनशैली संभव हो पाई है।

प्रवासन प्रबंधन और औद्योगिक विकास का संतुलन

हीरा तराशने और वस्त्र निर्माण जैसे उद्योगों का केंद्र होने के कारण सूरत में हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक आते हैं। ऐसे में आवास प्रबंधन एक जटिल चुनौती रहा है। बावजूद इसके, पिछले कुछ वर्षों में लाखों लोगों को स्थायी आवास में पुनर्वासित किया गया है। सूरत नगर निगम की यह क्षमता कि वह तीव्र औद्योगिक विकास के साथ-साथ समावेशी शहरी योजनाओं को संतुलित रूप से लागू कर सका, अब अन्य शहरों के लिए अध्ययन का विषय बन रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सूरत को भारत की हीरा राजधानी और वस्त्र केंद्र के रूप में जाना जाता है।
  • इन-सिटू पुनर्विकास का अर्थ है—उसी स्थान पर पुनर्निर्माण कराना जहाँ झुग्गी बस्तियाँ थीं।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का लक्ष्य ‘सभी के लिए आवास’ सुनिश्चित करना है।
  • शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies) स्लम पुनर्वास परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व

यदि सूरत आधिकारिक रूप से स्लम-फ्री शहर घोषित होता है, तो यह भारत के शहरी परिवर्तन के सफर में एक मील का पत्थर होगा। यह सफलता न केवल वैश्विक मंच पर भारत की समावेशी शहर योजना की छवि को बेहतर बनाएगी, बल्कि उन महानगरों के लिए एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करेगी जो झुग्गी पुनर्वास और किफायती आवास की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

सूरत का यह उदाहरण दर्शाता है कि ठोस नीति, सही क्रियान्वयन और सामाजिक समावेशन के साथ कोई भी शहर सामाजिक-आर्थिक बदलाव का केंद्र बन सकता है।

Originally written on January 2, 2026 and last modified on January 2, 2026.

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