भारत–कनाडा ऊर्जा सहयोग संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर: पारंपरिक और स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को नया आयाम
भारत और कनाडा ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के अवसर पर ऊर्जा सहयोग पर संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी को पारंपरिक और स्वच्छ दोनों क्षेत्रों में गहराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय राजनीतिक पुनःसंपर्क और कार्यस्तरीय संवाद को नई गति मिली है।
उच्च स्तरीय भागीदारी और रणनीतिक पुनर्संयोजन
यह संयुक्त वक्तव्य भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री तथा कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के पश्चात हस्ताक्षरित किया गया। यह पहला अवसर था जब कोई कनाडाई कैबिनेट मंत्री इंडिया एनर्जी वीक में शामिल हुआ। यह बैठक जून 2025 में कनाडा के कानानास्किस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत के बाद तय दिशा के अनुरूप हुई।
मंत्री स्तरीय ऊर्जा संवाद का पुनरारंभ
दोनों पक्षों ने भारत–कनाडा मंत्री स्तरीय ऊर्जा संवाद को पुनः सक्रिय किया। इस मंच का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति विविधता और दीर्घकालिक साझेदारी के लिए संरचित सरकारी संवाद सुनिश्चित करना और दोनों देशों की ऊर्जा कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग को सुगम बनाना है।
पारंपरिक ऊर्जा व्यापार में अवसर
कनाडा ने अपनी ऊर्जा क्षेत्र की ताकत को रेखांकित करते हुए बताया कि वह पारंपरिक और स्वच्छ ईंधनों दोनों में वैश्विक ऊर्जा महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है:
- LNG क्षमता विस्तार
- Trans Mountain Expansion Pipeline के माध्यम से एशिया को कच्चे तेल का निर्यात
- पश्चिमी तट से LPG निर्यात में वृद्धि
भारत, जो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक है, अगले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग वृद्धि का एक-तिहाई हिस्सा होगा। दोनों देशों ने LNG, LPG, कच्चा तेल और भारत से कनाडा को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर सहमति जताई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य:
- India Energy Week भारत द्वारा आयोजित एक प्रमुख वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन है।
- भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है।
- कनाडा एशिया के लिए LNG और कच्चा तेल निर्यात को बढ़ा रहा है।
- भारत–कनाडा मंत्री स्तरीय ऊर्जा संवाद को पुनः प्रारंभ किया गया है।
स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सहयोग
संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई। पारंपरिक ऊर्जा प्रणालियों में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) जैसे उपायों के माध्यम से उत्सर्जन में कटौती पर बल दिया गया।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:
- नवीकरणीय ऊर्जा
- हरित हाइड्रोजन और बायोफ्यूल
- सतत विमानन ईंधन
- बैटरी भंडारण और बिजली प्रणाली
- ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
दोनों देशों ने निरंतर संवाद, व्यापारिक सहयोग और बहुपक्षीय भागीदारी के माध्यम से वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई।
भारत–कनाडा ऊर्जा साझेदारी अब एक रणनीतिक और बहुआयामी सहयोग का रूप ले रही है, जो दोनों देशों के ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के साझा लक्ष्यों को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी।