भारत-इज़राइल रक्षा सहयोग के तहत ‘स्काई स्टिंग’ मिसाइल पर चर्चा तेज

भारत-इज़राइल रक्षा सहयोग के तहत ‘स्काई स्टिंग’ मिसाइल पर चर्चा तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल के दूसरे राजकीय दौरे के दौरान भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल रही है। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना के लिए इज़राइल की ‘स्काई स्टिंग’ बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) की संभावित खरीद पर चर्चा आगे बढ़ रही है। यह मिसाइल अभी विकास के चरण में है, लेकिन इसे चीन और पाकिस्तान से उभरते हवाई खतरों के बीच भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण हथियार माना जा रहा है।

स्काई स्टिंग मिसाइल की क्षमताएँ

स्काई स्टिंग मिसाइल का वजन लगभग 180 से 200 किलोग्राम के बीच है, जिससे यह हल्के लड़ाकू विमानों जैसे तेजस Mk1A पर भी आसानी से उपयोग की जा सकती है, जबकि यह Su-30MKI जैसे भारी प्लेटफॉर्म के साथ भी संगत है। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 250 किलोमीटर तक बताई जा रही है।

यह तीन-पल्स ठोस ईंधन रॉकेट मोटर से संचालित होती है, जिससे इसकी अंतिम गति मैक-5 से अधिक हो सकती है। इसमें रेडियो-फ्रीक्वेंसी सीकर के साथ एआई आधारित लक्ष्य पहचान प्रणाली और जैम-प्रतिरोधी तकनीक शामिल है, जिससे यह इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के बावजूद लक्ष्य पर सटीक प्रहार कर सकती है। साथ ही इसमें दो-तरफा डेटा लिंक भी होता है, जो उड़ान के दौरान पायलट को मार्गदर्शन और नियंत्रण की सुविधा देता है।

तेजस और इज़राइली प्रणालियों के साथ एकीकरण

स्काई स्टिंग मिसाइल को तेजस Mk1A में लगाए जाने वाले इज़राइली ELM-2052 AESA रडार के साथ जोड़े जाने की योजना है। इससे उन तकनीकी चुनौतियों का समाधान हो सकता है जो स्वदेशी अस्त्र Mk1 मिसाइल के कुछ रडार प्रणालियों के साथ एकीकरण में सामने आई थीं।

भारतीय वायुसेना पहले से ही इज़राइल की कई उन्नत प्रणालियों का उपयोग कर रही है। इनमें I-Derby ER और Python-5 एयर-टू-एयर मिसाइलें, SPYDER एयर डिफेंस सिस्टम तथा SPICE और Rampage जैसे सटीक हमले वाले हथियार शामिल हैं। इन प्रणालियों का उपयोग 2019 के बालाकोट ऑपरेशन सहित कई अभियानों में किया जा चुका है। प्रारंभिक चरण में स्काई स्टिंग मिसाइल को सीधे आयात किया जा सकता है, जिसके बाद राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स के सहयोग से भारत में उत्पादन की संभावना है।

अस्त्र कार्यक्रम पर संभावित प्रभाव

कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आयातित मिसाइलों पर अधिक निर्भरता भारत के स्वदेशी अस्त्र कार्यक्रम की गति को प्रभावित कर सकती है। अस्त्र मिसाइल का विकास डीआरडीओ द्वारा किया गया है और इसका उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है।

अस्त्र Mk1 की मारक क्षमता लगभग 110 किलोमीटर है, जबकि Mk2 की रेंज 200 किलोमीटर से अधिक होने की उम्मीद है। इसके अलावा Mk3 संस्करण, जो सॉलिड-फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक पर आधारित है, लगभग 350 किलोमीटर तक की मारक क्षमता प्राप्त कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित आयात के साथ घरेलू विकास को जारी रखना भारत की संतुलित रक्षा रणनीति का हिस्सा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • BVRAAM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो 20–30 किमी से अधिक दूरी पर लक्ष्य को भेद सकती हैं।
  • AESA रडार इलेक्ट्रॉनिक रूप से नियंत्रित बीम का उपयोग कर एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है।
  • अस्त्र भारत की स्वदेशी बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसका विकास डीआरडीओ ने किया है।
  • सॉलिड-फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक लंबी दूरी तक उच्च गति बनाए रखने में सहायक होती है।

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 29 सक्रिय स्क्वाड्रन हैं, जो 1962 के बाद सबसे कम स्तर माना जा रहा है। पुराने विमानों के धीरे-धीरे सेवा से हटने और नए विमानों की सीमित संख्या के कारण क्षमता अंतर उत्पन्न हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक रूप से उन्नत विदेशी प्रणालियों की खरीद और दीर्घकालिक रूप से स्वदेशी तकनीक के विकास के संयोजन से भारत अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने की रणनीति अपना रहा है।

Originally written on March 4, 2026 and last modified on March 4, 2026.

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