भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में बड़ी प्रगति: अतिरिक्त 25% शुल्क हटाने की घोषणा
संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने की घोषणा की है, जो 7 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। यह निर्णय भारत द्वारा रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता के बाद लिया गया है। यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को नई गति देने वाला माना जा रहा है।
शुल्क निर्णय की पृष्ठभूमि
अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाया था। इसका उद्देश्य रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाना था। इन शुल्कों से भारत के कई निर्यात क्षेत्रों को नुकसान पहुँचा था। अब भारत के ऊर्जा स्रोतों को लेकर आश्वासन देने के बाद अमेरिका ने अपनी व्यापार नीति में परिवर्तन करते हुए यह शुल्क हटाने का निर्णय लिया है।
कार्यान्वयन और कार्यकारी आदेश
व्हाइट हाउस द्वारा जारी कार्यकारी आदेश के अनुसार, 7 फरवरी 2026 को रात 12:01 बजे (ईस्टर्न स्टैंडर्ड टाइम) के बाद अमेरिका में प्रवेश करने वाले या गोदामों से निकाले गए भारतीय उत्पादों पर अब अतिरिक्त 25% ad valorem शुल्क नहीं लगेगा। इस निर्णय से शुल्क व्यवस्था को अगस्त 2025 से पहले की स्थिति में बहाल कर दिया गया है।
ऊर्जा प्रतिबद्धतियाँ और रणनीतिक आश्वासन
भारत ने अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वह रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल का आयात बंद कर देगा। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इस प्रतिबद्धता का सख्ती से मूल्यांकन किया जाएगा। यदि भारत द्वारा इन शर्तों का उल्लंघन पाया गया, तो अमेरिकी वाणिज्य सचिव दोबारा इन शुल्कों को लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Ad valorem शुल्क का अर्थ है—आयातित वस्तु के मूल्य के आधार पर लगाया गया कर।
- अमेरिका में Executive Order एक विधिक आदेश होता है जो संघीय एजेंसियों पर वैध प्रभाव डालता है।
- ऊर्जा व्यापार अब रणनीतिक कूटनीति का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
- टैरिफ (शुल्क) उपाय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक वार्ताओं में एक प्रभावी साधन होते हैं।
रक्षा सहयोग की नई रूपरेखा
व्यापार संबंधों में यह बदलाव केवल शुल्क तक सीमित नहीं है। भारत और अमेरिका ने आने वाले दस वर्षों के लिए रक्षा सहयोग का एक व्यापक ढांचा भी तैयार किया है। यह समझौता रक्षा खरीद, प्रौद्योगिकी साझेदारी और संयुक्त अभियानों में सहयोग को बढ़ावा देगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के संबंध अब व्यापार और ऊर्जा से आगे बढ़कर गहरे रणनीतिक साझेदारी की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
यह निर्णय भारत-अमेरिका संबंधों में विश्वास और सहयोग के नए युग की शुरुआत का संकेत है, जो आने वाले समय में भू-राजनीतिक और आर्थिक संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकता है।