भारतीय शिक्षिका रूबल नागी को मिला ग्लोबल टीचर प्राइज, झुग्गियों के बच्चों के लिए शिक्षा का परिवर्तनकारी मॉडल

भारतीय शिक्षिका रूबल नागी को मिला ग्लोबल टीचर प्राइज, झुग्गियों के बच्चों के लिए शिक्षा का परिवर्तनकारी मॉडल

भारतीय शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्ता रूबल नागी को ग्लोबल टीचर प्राइज 2024 से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें शहरी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करने और स्कूल से वंचित या ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से सीखने की राह पर लाने के लिए प्रदान किया गया। यह सम्मान 5 फरवरी को दुबई में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।

म्यूरल्स और लर्निंग सेंटर्स के ज़रिए नवाचार

रूबल नागी ने शिक्षा को रुचिकर और पहुँच योग्य बनाने के लिए एक अभिनव तरीका अपनाया — शैक्षिक म्यूरल्स और लर्निंग सेंटर्स। अब तक वे 800 से अधिक शिक्षण केंद्र भारत में स्थापित कर चुकी हैं। साथ ही, उन्होंने झुग्गियों की दीवारों पर साक्षरता, गणित, विज्ञान और इतिहास विषयों से संबंधित भित्तिचित्र बनाए हैं, जिनके माध्यम से दीवारें ही बच्चों के लिए कक्षा बन जाती हैं। इस दृश्यात्मक शिक्षा पद्धति ने हजारों बच्चों को स्कूल से जोड़ने में मदद की है।

जमीनी शिक्षा मॉडल और शिक्षक प्रशिक्षण

रूबल स्वयं गांवों और झुग्गियों में जाकर बच्चों के साथ काम करती हैं और इन शिक्षण केंद्रों के शिक्षकों को प्रशिक्षित व मार्गदर्शन भी देती हैं। उन्होंने अब तक 600 से अधिक स्वयंसेवी और वेतनभोगी शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण किया है। उनका मॉडल गरीबी, बाल श्रम, बाल विवाह और अनियमित उपस्थिति जैसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लचीली समय-सारणी, पुन: प्रयोज्य सामग्री से शिक्षण और परिवारों की आजीविका से जुड़ी कौशल-आधारित शिक्षा प्रदान करता है।

ग्लोबल टीचर प्राइज और भविष्य की योजना

ग्लोबल टीचर प्राइज की शुरुआत 2015 में हुई थी और यह हर वर्ष उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण नवाचार और सामाजिक प्रभाव डाला हो। यह पुरस्कार $1 मिलियन (लगभग ₹8.3 करोड़) की पुरस्कार राशि के साथ आता है। रूबल नागी इस पुरस्कार को जीतने वाली दसवीं वैश्विक विजेता बनी हैं। वे इस राशि का उपयोग एक संस्थान स्थापित करने के लिए करेंगी, जहाँ छात्रों को मुफ्त व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्लोबल टीचर प्राइज की स्थापना वर्ष 2015 में की गई थी।
  • यह पुरस्कार $1 मिलियन की राशि के साथ दिया जाता है।
  • यह उन शिक्षकों को सम्मानित करता है जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सामाजिक प्रभाव डाला हो।
  • इसके पूर्व विजेताओं में केन्या, फिलिस्तीन, कनाडा और सऊदी अरब के शिक्षक शामिल हैं।

रूबल नागी की सफलता न केवल भारत की समावेशी शिक्षा पहलों की वैश्विक पहचान है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब शिक्षा को जमीनी स्तर से जोड़ा जाए और स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाला जाए, तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है। उनका कार्य आने वाले वर्षों में अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनेगा।

Originally written on February 5, 2026 and last modified on February 5, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *