भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया नया लीड-फ्री स्वचालित फोटोडिटेक्टर

भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया नया लीड-फ्री स्वचालित फोटोडिटेक्टर

भारत में वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल फोटोडिटेक्टर विकसित किया है, जो बिना किसी बाहरी ऊर्जा आपूर्ति के काम करता है और दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करता है। यह नवाचार उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक निगरानी, सुरक्षा प्रणालियों और जैवचिकित्सकीय इमेजिंग जैसे कई क्षेत्रों में टिकाऊ और हरित समाधान के रूप में उभर रहा है।

अनुसंधान संस्थान और सहयोग

इस तकनीकी सफलता के पीछे अंतरराष्ट्रीय पाउडर धातुकर्म और नवीन सामग्री अनुसंधान केंद्र (ARCI), हैदराबाद के वैज्ञानिकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद के शोधकर्ताओं की संयुक्त टीम है। एआरसीआई विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। इस खोज को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Solar Energy (Elsevier) में प्रकाशित किया गया है।

लीड-फ्री फोटोडिटेक्टर का महत्व

फोटोडिटेक्टर प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलते हैं और ये कैमरों, पर्यावरण सेंसर, स्मार्ट वियरेबल्स और इमेजिंग सिस्टम में अनिवार्य घटक होते हैं। आज अधिकांश उच्च-प्रदर्शन फोटोडिटेक्टरों में लेड-आधारित परोव्स्काइट्स का उपयोग होता है, जो पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के साथ-साथ वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन गिरावट जैसी समस्याओं से ग्रस्त हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने Cs₂AgBiBr₆ नामक लीड-फ्री डबल परोव्स्काइट सामग्री पर आधारित उपकरण विकसित कर इन समस्याओं का समाधान किया है।

अभिनव डिज़ाइन और निर्माण प्रक्रिया

इस फोटोडिटेक्टर की संरचना को सरल, लागत-कुशल और टिकाऊ बनाया गया है। यह होल-ट्रांसपोर्ट सामग्री से मुक्त है और इसमें सस्ते कार्बन इलेक्ट्रोड का उपयोग किया गया है, जिससे महंगे धातु संपर्कों और अतिरिक्त परतों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। यह उपकरण सामान्य तापमान पर एकल-चरण कोटिंग प्रक्रिया से, बिना किसी ग्लोवबॉक्स या वैक्यूम प्रणाली के तैयार किया जाता है। इसका डिज़ाइन कुशल चार्ज पृथक्करण को सक्षम बनाता है, जिससे यह बाहरी वोल्टेज आपूर्ति के बिना स्वतः संचालित हो सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एआरसीआई (ARCI) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है।
  • Cs₂AgBiBr₆ एक लीड-फ्री डबल परोव्स्काइट सामग्री है।
  • फोटोडिटेक्टर प्रकाश को विद्युत संकेत में परिवर्तित करते हैं।
  • Self-powered उपकरण बाहरी ऊर्जा स्रोत के बिना काम करते हैं।

प्रदर्शन स्थिरता और भविष्य की संभावनाएं

प्रदर्शन परीक्षणों में इस फोटोडिटेक्टर ने उच्च स्थिरता और विश्वसनीय ON–OFF स्विचिंग दिखाई। सामान्य कक्ष तापमान में 60 दिनों के भंडारण के बाद भी यह अपनी 90% से अधिक कार्यक्षमता बनाए रखने में सक्षम रहा। इसकी पर्यावरणीय स्थिरता, सस्ता निर्माण और स्वदेशी तकनीकी विकास के कारण यह नवाचार भारत के “हरित विनिर्माण” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे लक्ष्यों के अनुरूप है।

यह तकनीक भविष्य में भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, पर्यावरण-मित्र और कम लागत वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में वैश्विक अग्रणी बना सकती है।

Originally written on February 5, 2026 and last modified on February 5, 2026.

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