भारतीय रेल में ओटीपी आधारित टिकटिंग व्यवस्था: सुरक्षित और पारदर्शी यात्रा की दिशा

भारतीय रेल में ओटीपी आधारित टिकटिंग व्यवस्था: सुरक्षित और पारदर्शी यात्रा की दिशा

भारतीय रेल ने यात्रियों की पहचान सुनिश्चित करने और अवैध बुकिंग प्रथाओं को रोकने के लिए एक नई ओटीपी आधारित टिकटिंग प्रणाली लागू की है। यह पहल पारदर्शिता बढ़ाने, टिकटिंग प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने, और रेल यात्री ढांचे के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस नए सिस्टम के तहत टिकट जारी करने से पहले यात्रियों की पहचान उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए एक-समय के पासवर्ड (OTP) के माध्यम से सत्यापित की जाएगी।

ओटीपी आधारित टिकटिंग की आवश्यकता

भारत में रेलवे टिकटिंग एक बहुत बड़ा और चुनौती भरा कार्य है। हर दिन लाखों यात्रियों की टिकट बुक होती हैं, और इसी दौरान नकली बुकिंग, एजेंटों द्वारा अनियमित बुकिंग, और यात्रा की वास्तविकता का पता न चल पाना जैसे कई मुद्दे सामने आते रहे हैं। ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल साधन के रूप में सामने आई है। इससे न केवल टिकट व्यवस्था अधिक सुरक्षित होगी, बल्कि यात्रियों को भी असुरक्षित प्रथाओं से बचने में मदद मिलेगी।

नई ओटीपी टिकटिंग कैसे काम करेगी

ओटीपी आधारित टिकटिंग प्रक्रिया में यात्रियों को यात्रा के लिए टिकट बुक करते समय अपने मोबाइल नंबर को दर्ज करना होगा। इस मोबाइल नंबर पर तुरंत एक एक-समय पासवर्ड भेजा जाएगा। टिकट काउंटर पर या ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म पर टिकट जारी करने से पहले यह ओटीपी सत्यापित किया जाएगा। केवल सत्यापित ओटीपी प्राप्त होने के बाद ही टिकट जारी होगी। इससे यात्रियों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित होगी तथा नकली या बॉट्स द्वारा की जाने वाली बुकिंग रोकी जा सकेगी।

ऑनलाइन टिकट बुक करते समय भी इसी तरह का सत्यापन स्टेप लागू किया गया है। भारतीय रेल के पोर्टल पर यदि कोई यात्री टिकट बुक करता है, तो उस समय भी उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है जिसे सत्यापित करने के बाद ही टिकट कन्फर्म होगी। इससे काउंटर और डिजिटल दोनों प्रकार की बुकिंग में एक समान मानक लागू होता है।

प्रमुख रूट्स और ट्रेन सेवाओं में कवरेज

यह नया ओटीपी प्रणाली 12 जनवरी से प्रभावी हुई और भारत भर के 300 प्रमुख ट्रेनों में लागू की गई है। राजधानी, शताब्दी और दुरONTO जैसे प्रीमियम ट्रेन सेवाएं इस व्यवस्था के पहले चरण में शामिल हैं। कुछ क्षेत्रों में, जैसे प्रयागराज, पहले से ही काउंटर टिकटों के लिए ओटीपी सत्यापन का परीक्षण किया जा चुका है। इसके सफल परीक्षण के बाद अब यह प्रक्रिया विस्तृत ज़ोन और उच्च मांग वाली ट्रेनों में मानकीकृत रूप से लागू की जा रही है।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के सत्यापन से टिकटिंग प्रक्रिया में अनुचित बुकिंग, बॉट्स द्वारा की जाने वाली प्रशासनिक बुकिंग, और एक ही व्यक्ति द्वारा अनेक बुकिंग जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। साथ ही यात्रियों के मन में टिकटिंग प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ेगा और वे एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर यात्रा की योजना बना सकेंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यह ओटीपी आधारित टिकटिंग प्रणाली 12 जनवरी से लागू की गई है और इसे शुरूआती चरण में 300 प्रमुख ट्रेनों में लागू किया गया है।
  • ओटीपी सत्यापन ऑनलाइन और काउंटर दोनों प्रकार की बुकिंग के लिए अनिवार्य है।
  • राजधानी, शताब्दी और दुरONTO एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेन सेवाएं इस व्यवस्था के पहले चरण में शामिल हैं।
  • प्रणाली का उद्देश्य नकली एवं अनाधिकृत बुकिंग को रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना है।

आगे की योजना

रेलवे अधिकारियों ने बताया है कि इस व्यवस्था का rollout चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। यदि यह प्रणाली सफलतापूर्वक काम करती है, तो इसे पूरे नेटवर्क में सभी ट्रेनों पर लागू करने की योजना है। एक व्यापक ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली से भारतीय रेलवे टिकटिंग ढांचे को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा। ऐसे डिजिटल उपाय यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं तथा रेल यात्रा को और अधिक सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

भारतीय रेलवे की यह पहल एक बड़े डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में सेवाओं को और अधिक संरक्षित एवं सक्षम बनाने में मदद करेगी।

Originally written on January 14, 2026 and last modified on January 14, 2026.

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