भारतीय महासागर में 6,000 मीटर गहराई पर बनेगी दुनिया की सबसे गहरी जलमग्न प्रयोगशाला
भारत ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की है जिसके तहत भारतीय महासागर में 6,000 मीटर की गहराई पर दुनिया की सबसे गहरी अंडरवॉटर रिसर्च लैब का निर्माण किया जाएगा। यह पहल देश के विजन 2047 कार्यक्रम का प्रमुख स्तंभ है और इसका उद्देश्य समुद्री विज्ञान में दीर्घकालिक मिशनों तथा गहरे समुद्र में उन्नत अनुसंधान को एक नई दिशा देना है।
परियोजना की अवधारणा और प्रारंभिक चरण
परियोजना की शुरुआत एक डेमॉन्स्ट्रेटर मॉड्यूल से होगी, जिसे 500 मीटर की गहराई पर तैनात किया जाएगा। इसमें तीन वैज्ञानिक एक दिन से अधिक समय तक पानी के नीचे रहकर प्रयोग कर सकेंगे। यह मॉड्यूल जीवन-समर्थन प्रणाली, तापमान नियंत्रण, और पनडुब्बियों के लिए डॉकिंग सुविधा से लैस होगा। विशेषज्ञों ने इसकी तुलना समुद्र के भीतर एक “इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन” से की है, जो गहरे समुद्र में मानव मिशनों की तकनीकी और तार्किक चुनौतियों का परीक्षण करेगा।
डिजाइन और संरचनात्मक विशेषताएँ
पूर्ण विकसित प्रयोगशाला को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वह सतह की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक दबाव को झेल सके। इसमें पारदर्शी पैनलों के माध्यम से 360-डिग्री दृश्य की सुविधा, ऑक्सीजन का नियमन, तापमान नियंत्रण और एकीकृत वैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ होंगी। स्टेशन से सतह तक पहुँच के लिए एक विशेष डॉकिंग सिस्टम बनाया जाएगा, जिससे सामग्री और वैज्ञानिक दलों का नियमित आदान-प्रदान संभव होगा।
अनुसंधान उद्देश्य और वैज्ञानिक लाभ
यह प्रयोगशाला गहरे समुद्र में जैव-विविधता, भूगर्भीय संरचनाओं, रासायनिक प्रक्रियाओं और उच्च दबाव में मानव सहनशीलता पर केंद्रित अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगी। संभावित अनुसंधानों में जैव-प्रौद्योगिकी, नई औषधियों की खोज और दुर्लभ सूक्ष्मजीवों का अध्ययन शामिल होगा। लगातार और प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण की क्षमता भारत को समुद्री विज्ञान के वैश्विक क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत 2047 तक 6,000 मीटर गहराई में अंडरवॉटर रिसर्च स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है।
- परियोजना का पहला चरण 500 मीटर डेमॉन्स्ट्रेटर मॉड्यूल होगा।
- इस स्टेशन को “अंडरवॉटर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन” की तरह डिजाइन किया गया है।
- 6 किमी गहराई पर अत्यधिक दबाव से बचाव हेतु टाइटेनियम और कंपोज़िट सामग्री का प्रयोग होगा।
- वर्तमान में केवल एक परिचालित जलमग्न प्रयोगशाला एक्वेरियस रीफ बेस (अमेरिका) 19 मीटर गहराई पर कार्यरत है।
वैश्विक संदर्भ और चुनौतियाँ
भारत की यह परियोजना न केवल तकनीकी दृष्टि से जटिल है, बल्कि इसमें दबाव-रोधी संरचना, जलमग्न संचार प्रणाली और ऊर्जा आपूर्ति जैसी प्रमुख चुनौतियाँ शामिल हैं। ध्वनि-आधारित तथा फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से संचार और सतह से जुड़ी ऊर्जा केबलें इस मिशन की प्रमुख तकनीकी नींव होंगी। सफल कार्यान्वयन के बाद, यह स्टेशन गहरे समुद्र में दीर्घकालिक मानव उपस्थिति की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगा।