भारतीय नौसेना में शामिल हुआ ‘संशोधक’ सर्वेक्षण पोत
भारतीय नौसेना को हाल ही में ‘संशोधक’ नामक सर्वेक्षण पोत प्राप्त हुआ है, जो एक महत्वपूर्ण स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा निर्मित यह चौथा और अंतिम सर्वे वेसल (लार्ज) है। इस पोत के शामिल होने से भारत की समुद्री सर्वेक्षण क्षमता और मजबूत हुई है, जिससे रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों में समुद्री संचालन को लाभ मिलेगा।
परियोजना की पृष्ठभूमि और विकास
चार सर्वे वेसल (लार्ज) के निर्माण के लिए अनुबंध 30 अक्टूबर 2018 को किया गया था। ‘संशोधक’ इस श्रृंखला का अंतिम जहाज है, इससे पहले ‘संधायक’, ‘निर्देशक’ और ‘इक्षाक’ को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इन सभी जहाजों का निर्माण भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग के मानकों के अनुसार किया गया है, जो भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
भूमिका और कार्य
‘संशोधक’ का मुख्य कार्य तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। यह पोत बंदरगाहों और हार्बर के मार्गों का मानचित्रण करता है तथा सुरक्षित नौवहन मार्गों की पहचान में सहायता करता है। इसके अलावा, यह समुद्री भू-भौतिक और महासागरीय डेटा एकत्र करता है, जो नौसेना के साथ-साथ नागरिक क्षेत्रों जैसे बंदरगाह विकास और तटीय प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी होता है।
आधुनिक तकनीक और विशेषताएं
यह पोत अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। इसमें डेटा संग्रहण और प्रोसेसिंग सिस्टम, ऑटोनोमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), डीजीपीएस आधारित पोजिशनिंग सिस्टम और डिजिटल साइड स्कैन सोनार जैसे उपकरण शामिल हैं। ये सभी तकनीकें समुद्र तल का सटीक मानचित्रण और विभिन्न परिस्थितियों में डेटा संग्रहण को संभव बनाती हैं।
तकनीकी विशेषताएं और रणनीतिक महत्व
‘संशोधक’ का विस्थापन लगभग 3,400 टन है और यह दो डीजल इंजनों द्वारा संचालित होता है, जिससे यह 18 नॉट्स से अधिक गति प्राप्त कर सकता है। इस पोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता को दर्शाता है। इसकी तैनाती से समुद्री क्षेत्र की निगरानी, सुरक्षित नौवहन और भारत की सामरिक तैयारी को मजबूती मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ‘संशोधक’ 2018 के अनुबंध के तहत बना चौथा सर्वे वेसल (लार्ज) है।
- इसका निर्माण कोलकाता स्थित GRSE द्वारा किया गया है।
- यह हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और महासागरीय डेटा संग्रह के लिए उपयोगी है।
- इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
अंततः, ‘संशोधक’ का भारतीय नौसेना में शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि समुद्री संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और विकास में भी सहायक सिद्ध होगा।