भारतीय नौसेना में शामिल ‘मालवन’ से तटीय सुरक्षा मजबूत
भारतीय नौसेना ने हाल ही में ‘मालवन’ नामक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) को अपने बेड़े में शामिल किया है। यह कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित इस श्रेणी का दूसरा पोत है। इसकी तैनाती भारत की तटीय निगरानी और जल के भीतर सुरक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ करेगी। यह आठ पोतों की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उथले और तटीय क्षेत्रों में नौसेना की संचालन क्षमता को बढ़ाना है।
समर्पित ASW शैलो वाटर बेड़े का हिस्सा
‘मालवन’ उन आठ स्वदेशी जहाजों में से दूसरा है, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इनका निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया गया है। ये पोत तटीय और उथले जल क्षेत्रों में संचालन के लिए बनाए गए हैं, जहां पनडुब्बियों का पता लगाना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। यह परियोजना समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आधुनिक तकनीक और संचालन क्षमता
लगभग 80 मीटर लंबा और 1,100 टन विस्थापन वाला यह पोत जलजेट प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जिससे यह उथले जल में भी उच्च गतिशीलता बनाए रख सकता है। ‘मालवन’ एंटी-सबमरीन युद्ध, पानी के भीतर निगरानी, माइन वारफेयर और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इसमें टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट्स, आधुनिक रडार और सोनार प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं, जो इसे दुश्मन की गतिविधियों का सटीक पता लगाने में सक्षम बनाती हैं।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
इस पोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत की रक्षा निर्माण क्षमता में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। इसमें देश के विभिन्न रक्षा उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) द्वारा विकसित प्रणालियों का समावेश है। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ देश के शिपबिल्डिंग क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करती है।
नाम का ऐतिहासिक महत्व
इस पोत का नाम ‘मालवन’ महाराष्ट्र के एक ऐतिहासिक तटीय नगर पर रखा गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री विरासत से जुड़ा है। यह नाम भारतीय नौसेना के पुराने पोत INS मालवन की भी याद दिलाता है, जिसने वर्ष 2003 तक सेवा दी थी। इस प्रकार यह नामकरण परंपरा और आधुनिकता के समन्वय को दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ‘मालवन’ भारतीय नौसेना का दूसरा ASW शैलो वाटर क्राफ्ट है।
- यह आठ पोतों की श्रृंखला का हिस्सा है।
- इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है।
- इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है।
अंततः, ‘मालवन’ का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान करता है। यह न केवल तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा को बेहतर बनाएगा, बल्कि देश की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को भी आगे बढ़ाएगा।